Delhi दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर 6 अक्टूबर को प्रस्तावित INDIA गठबंधन के मार्च पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर निशाना साधा है। शिंदे ने विपक्ष पर ‘दोहरी राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाता, लेकिन हार मिलने पर उसी संस्था को निशाना बनाया जाता है। INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को संसद भवन से चुनाव आयोग तक संयुक्त मार्च का ऐलान किया है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
इस प्रस्तावित मार्च को लेकर एकनाथ शिंदे ने कहा कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है। उन्होंने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा, “लोकसभा के बाद विधानसभा में यही विपक्ष मोर्चा निकालता है कि वोटर बढ़े कैसे और अब यही विपक्ष बोलता है कि वोटर कम कैसे हुए? ये दोहरी राजनीति कर रहे हैं। शिंदे ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में अगर किसी की गलती है या किसी स्तर पर कोई खामी सामने आती है तो उसे जरूर दुरुस्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर चुनावी नतीजों के आधार पर चुनाव आयोग को लेकर अपना रुख बदलने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “जब जीत उनको हासिल होती है तो चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं और जब हारते हैं तो चुनाव आयोग को गालियां देते हैं।” शिंदे ने तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु का उल्लेख करते हुए विपक्ष से सवाल किया कि जहां उसे चुनावी सफलता मिली, वहां चुनाव आयोग को लेकर इसी तरह सवाल क्यों नहीं उठाए गए। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है। अदालत ने उनकी तत्काल निलंबन की मांग पर अंतरिम आदेश देने से इनकार करते हुए केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।
दूसरी तरफ विपक्ष लगातार SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग को घेर रहा है। महाराष्ट्र और दिल्ली में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है, जबकि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची और फॉर्म-6 से जुड़े कुछ आरोपों को भ्रामक बताया है। शिंदे ने विपक्ष के इस रुख को राजनीतिक विरोधाभास बताते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी वास्तविक खामी को ठीक किया जाना चाहिए, लेकिन चुनाव के परिणाम के आधार पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। अब 6 अक्टूबर के प्रस्तावित मार्च को लेकर दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।