ED ने उन्नति फॉर्च्यून और अनिल मिठास पर पूरक चार्जशीट दायर, संपत्तियां कुर्क

Update: 2026-01-29 17:59 GMT
Lucknow लखनऊ। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोएडा स्थित रियल एस्टेट कंपनी उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड (यूएफएचएल) और उसके मुख्य प्रमोटर अनिल मिठास के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा मामला दर्ज किया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत जांच पूरी करते हुए कंपनी और अनिल मिठास के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दायर की है। यह शिकायत विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निरोधक (सीबीआई), गाजियाबाद की अदालत में पेश की गई है।
जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर पर आधारित है, जिसमें यूएफएचएल, अनिल मिठास, मधु मिठास और कंपनी के अन्य अधिकारियों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी का आरोप लगा था। ईडी की जांच में सामने आया कि 2011 से 2019 के बीच कंपनी ने घर खरीदारों और निवेशकों से जुटाए गए फंड का गबन किया। कंपनी के कई बैंक खातों में जमा हुए पैसे को अनिल मिठास ने इक्विटी निवेश, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर, बॉन्ड, ऋण, अग्रिम और सुरक्षा जमा जैसे तरीकों से संबंधित पार्टियों को लगभग 126 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए 
यह फंड मूलरूप से 'अरण्या' जैसे आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए इकट्ठा किया गया था, लेकिन इसका दुरुपयोग होने से प्रोजेक्ट अधूरे रह गए। इससे घर खरीदारों और वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ, जबकि कंपनी के निदेशकों और प्रमोटरों को गलत फायदा पहुंचा। ईडी ने 16 अप्रैल 2025 को अनिल मिठास को गिरफ्तार किया, जो अभी न्यायिक हिरासत में है। अगले दिन 17 अप्रैल को कंपनी और संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त हुए। 
अब तक ईडी ने यूएफएचएल, उसके प्रमोटरों और सहयोगी संस्थाओं से जुड़ी 126 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। इसमें हाल ही में 8 सितंबर 2025 को अरण्या प्रोजेक्ट से जुड़ी अनिल मिठास (एचयूएफ) की लगभग 100 करोड़ रुपए की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गईं। इससे पहले ईडी ने 13 जून 2025 को मुख्य अभियोजन शिकायत दायर की थी, जिस पर अदालत ने 18 अगस्त 2025 को संज्ञान लिया और चार्जशीट फाइल कर दी। जांच में पता चला कि कंपनी ने घर खरीदारों से कुल 522 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए थे, लेकिन बड़े पैमाने पर फंड का गबन हुआ। ईडी की यह कार्रवाई घर खरीदारों के हितों की रक्षा और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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