वन विभाग की लापरवाही से कॉलोनी में घुसा मगरमच्छ, रेस्क्यू जारी
लोगों ने खुद किया रेस्क्यू
Shivpuri शिवपुरी: शहर के द्वारकापुरी कॉलोनी में शनिवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब एक खतरनाक मगरमच्छ अंधेरे में रिहायशी इलाके में घुस आया। कॉलोनी में अचानक इस विशाल सरीसृप को देखकर लोगों में दहशत फैल गई, बच्चे और बुजुर्ग अपने घरों में कैद हो गए। स्थानीय निवासियों ने तत्काल वन विभाग की रेस्क्यू टीम को फोन कर सूचना दी, लेकिन अधिकारियों की सुस्त कार्यशैली के चलते टीम मौके पर नहीं पहुंची। जानकारी के अनुसार, रात करीब नौ बजे कुछ लोगों ने कॉलोनी के पार्क के पास झाड़ियों में हरकत देखी। जब टॉर्च की रोशनी डाली गई तो लोगों ने देखा कि करीब साढ़े छह फीट लंबा मगरमच्छ पानी की तलाश में गलियों की ओर बढ़ रहा था। घबराए लोगों ने वन विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर कई बार कॉल की, मगर घंटों बीतने के बाद भी कोई मदद नहीं पहुंची।
खुद जुटाया हौसला, किया रेस्क्यू
वन विभाग की इस लापरवाही से आक्रोशित कॉलोनी वासियों ने अपनी सुरक्षा स्वयं संभालने का निर्णय लिया। कुछ युवकों ने रस्सियों और जालों की मदद से मगरमच्छ को घेरने की कोशिश की। लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद उन्होंने मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से रस्सी से बांध लिया। इसके बाद लोगों ने मगरमच्छ को ट्रॉली पर रखकर सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) कार्यालय के गेट के बाहर लाकर बांध दिया। इस दौरान मौके पर सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग एकत्रित हो गए और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कॉलोनी निवासियों का कहना था कि अगर वे समय पर पहल नहीं करते, तो यह मगरमच्छ किसी को गंभीर रूप से घायल कर सकता था।
वीडियो हुआ वायरल, विभाग की खुली पोल
पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी निवासी ने मोबाइल से रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लोग बिना किसी सुरक्षात्मक उपकरण के मगरमच्छ को पकड़ रहे हैं और बाद में उसे विभागीय दफ्तर के बाहर बांधते हैं। वीडियो वायरल होने के बाद शहरभर में वन विभाग की कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यदि किसी की जान चली जाती, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
वन विभाग की चुप्पी और जनता का गुस्सा
मामले के तूल पकड़ने के बावजूद वन विभाग ने चुप्पी साध ली है। न तो स्थानीय अधिकारियों ने कोई बयान दिया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि रेस्क्यू टीम मौके पर क्यों नहीं पहुंची। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी अविनाश सिंह ने कहा, “यह सिर्फ वन विभाग की लापरवाही नहीं, बल्कि जन सुरक्षा से खिलवाड़ है। रिहायशी इलाकों में वन्यजीवों के प्रवेश की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन विभाग समय पर कार्रवाई नहीं करता।”
इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीव सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के बाद तालाब और नदी क्षेत्रों के सूखने से मगरमच्छ और सांप जैसे जीव अक्सर बस्तियों की ओर आ जाते हैं, ऐसे में विभाग को फौरन प्रतिक्रिया देने वाली टीम और रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए।
जनता में भय और असंतोष
कॉलोनीवासियों ने कहा कि अब उन्हें रात के समय बाहर निकलने में डर लगने लगा है। बच्चों को घरों से बाहर खेलने नहीं भेजा जा रहा है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में तुरंत सुरक्षा उपाय, जैसे चेतावनी बोर्ड, निगरानी कैमरे और बाड़ लगाने की व्यवस्था की जाए।