अहमदाबाद। गुजरात में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने सोने की तस्करी करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। डीआरआई की कार्रवाई में लगभग 19.41 करोड़ रुपये मूल्य के 13.017 किलोग्राम विदेशी सोने से जुड़े अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तस्करी का यह नेटवर्क अहमदाबाद और सूरत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के जरिए संचालित किया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि गिरोह के तार दुबई तक जुड़े हुए हैं और तस्करी के सोने को गुजरात में गलाकर स्थानीय बाजार में बेचा जाता था।
डीआरआई की इस कार्रवाई ने सोने की तस्करी के पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली उजागर कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह विदेशी सोने को अलग-अलग तरीकों से छिपाकर भारत लाता था। इसके बाद एयरपोर्ट के बाहर मौजूद सहयोगियों के जरिए सोने को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जाता था।
42 घंटे तक चला डीआरआई का विशेष ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार, डीआरआई को सोने की तस्करी करने वाले गिरोह के संबंध में खुफिया सूचना मिली थी। इसके आधार पर अधिकारियों ने संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी शुरू की।
इसके बाद 16 अक्टूबर 2026 से लगातार 42 घंटे तक विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर तलाशी और जांच की कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे तरीकों, सोने को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले लोगों और अवैध कारोबार से जुड़े ठिकानों की पहचान की।
कार्रवाई के दौरान यह सामने आया कि गिरोह केवल एयरपोर्ट से सोना बाहर निकालने तक सीमित नहीं था, बल्कि उसे गलाने और बाजार में बेचने की भी पूरी व्यवस्था थी।
ट्रॉली बैग में छिपाकर लाया जाता था सोना
प्रारंभिक जांच में डीआरआई को सोने की तस्करी के कई तरीके पता चले हैं। तस्कर विदेश से आने वाले यात्रियों के माध्यम से सोना भारत पहुंचाते थे।
जांच में सामने आया कि सोने के पतले तारों पर रोडियम की परत चढ़ाई जाती थी, ताकि उनकी पहचान करना मुश्किल हो सके। इसके अलावा ट्रॉली बैग की अंदरूनी परतों में सोना छिपाया जाता था।
कुछ मामलों में सोने को पेस्ट के रूप में बदलकर बैग के अंदरूनी हिस्सों में छिपाने की जानकारी भी सामने आई है। इस तरीके से तस्कर हवाई अड्डों पर होने वाली जांच से बचने की कोशिश करते थे।
भारत पहुंचने के बाद यात्री कथित तौर पर यह सोना एयरपोर्ट के बाहर मौजूद हैंडलरों को सौंप देते थे। इसके बाद सोना बिचौलियों के माध्यम से आगे पहुंचाया जाता था।
वडोदरा में चल रही थी अवैध सोना गलाने की इकाई
डीआरआई की जांच में खुलासा हुआ कि तस्करी करके लाए गए विदेशी सोने को वडोदरा स्थित एक अवैध इकाई में भेजा जाता था। इस इकाई में सोने को गलाकर उसका स्वरूप बदल दिया जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, सोना गलाने के बाद उसे अहमदाबाद स्थित एक आभूषण दुकान तक पहुंचाया जाता था। यहां तस्करी के सोने को नकद भुगतान के बदले बेचने की व्यवस्था थी।
अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया के जरिए सोने के विदेशी मूल और तस्करी से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने की कोशिश की जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में हवाई यात्रियों, हैंडलरों, बिचौलियों और आभूषण कारोबार से जुड़े व्यक्तियों की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं।
तलाशी में मिले सोने और अवैध कारोबार के सबूत
डीआरआई की संयुक्त कार्रवाई के दौरान लगभग 890 ग्राम सोना जब्त किया गया। इसके अतिरिक्त 6.41 किलोग्राम सोने को अवैध तरीके से गलाने से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मिले।
अहमदाबाद में आभूषण दुकान की तलाशी के दौरान बिना वैध दस्तावेजों वाले विदेशी सोने के बिस्कुट भी बरामद हुए। यहां लगभग 5.8 किलोग्राम तस्करी के सोने से जुड़े लेनदेन का रिकॉर्ड मिला।
अधिकारियों के अनुसार, कुल 13.017 किलोग्राम सोने से संबंधित अवैध गतिविधियों का खुलासा हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत 19.41 करोड़ रुपये है। हालांकि, इस पूरे वजन को मौके से भौतिक रूप में जब्त किए गए सोने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि इसमें दस्तावेजों और जांच से सामने आए लेनदेन भी शामिल हैं।
दुबई में बैठे फाइनेंसर से जुड़े गिरोह के तार
इस मामले में एक महत्वपूर्ण जानकारी दुबई से जुड़े वित्तीय नेटवर्क को लेकर सामने आई है। जांच में पता चला है कि गिरोह का एक प्रमुख फाइनेंसर दुबई में मौजूद है।
डीआरआई के अनुसार, तस्करी के सोने की आपूर्ति से जुड़े एक अलग चैनल का संबंध भी इसी फाइनेंसर से था। अधिकारियों ने इस नेटवर्क में शामिल प्रमुख लोगों, सोना गलाने वाली इकाई के संचालक और अन्य सहयोगियों की पहचान की है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था और अब तक कितनी मात्रा में विदेशी सोना भारत लाया गया।
सीमा शुल्क अधिनियम के तहत तीन आरोपी गिरफ्तार
इस पूरे मामले में डीआरआई ने तीन लोगों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपियों की भूमिका और उनके संपर्कों की जांच जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि संगठित तस्करी के मामलों में केवल सोना लेकर आने वाले व्यक्तियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती। इसके पीछे काम करने वाले वित्तीय सहयोगियों, बिचौलियों और बाजार में माल खपाने वाले लोगों की पहचान भी जरूरी है।
इसी उद्देश्य से जांच एजेंसी ने सोने की आपूर्ति, उसे गलाने और बिक्री तक की पूरी श्रृंखला की जांच की है।
तस्करी के नेटवर्क पर जांच जारी
डीआरआई की इस कार्रवाई से गुजरात में विदेशी सोने की अवैध आपूर्ति करने वाले एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अहमदाबाद और सूरत के हवाई अड्डों से लेकर वडोदरा की अवैध गलाने वाली इकाई और अहमदाबाद के आभूषण बाजार तक गिरोह की गतिविधियां फैली हुई थीं।
डीआरआई अब इस मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य तस्करी के पूरे नेटवर्क की पहचान करना और अवैध सोने के कारोबार से जुड़े सभी प्रमुख व्यक्तियों तक पहुंचना है।