DMK-झामुमो से बदल सकता है सियासी समीकरण

Update: 2026-07-15 14:37 GMT

नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार ने सियासी समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। सरकार दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में लगी है और अब उसकी नजर उन दलों पर है, जिनके समर्थन से आंकड़ों का अंतर कम किया जा सकता है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के समर्थन के संकेत मिलने के बाद NDA बहुमत के और करीब पहुंच गया है। वहीं डीएमके और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) जैसे दलों का रुख इस विधेयक के भविष्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के आठ सांसदों के समर्थन की स्थिति में सरकार समर्थक सांसदों की संख्या बढ़कर करीब 332 तक पहुंच सकती है। हालांकि लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। 543 सदस्यीय लोकसभा में यह आंकड़ा लगभग 362 सांसदों का है। यानी सरकार को अभी भी करीब 30 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

पहले प्रयास में नहीं मिल सका था बहुमत

महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार को पहले भी चुनौती का सामना करना पड़ा था। 17 अप्रैल को हुए मतदान में विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष में 230 सांसदों ने मतदान किया था। उस समय कुल 528 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया था और विधेयक पारित कराने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। ऐसे में सरकार बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी। अब मानसून सत्र में सरकार नए सिरे से रणनीति बना रही है। NDA की कोशिश है कि विपक्षी खेमे के उन दलों को साथ लाया जाए, जो विधेयक के समर्थन में आ सकते हैं।

डीएमके की भूमिका होगी अहम

डीएमके के 22 सांसदों का रुख इस पूरे मामले में निर्णायक माना जा रहा है। हालांकि पार्टी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा रही है, लेकिन कई मुद्दों पर उसका रुख अलग रहा है। अगर डीएमके विधेयक के समर्थन में आती है तो सरकार के लिए बहुमत का रास्ता काफी आसान हो सकता है। वहीं अगर पार्टी विरोध करती है तो सरकार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना चुनौती बन जाएगा।

झामुमो और छोटे दलों पर भी नजर

डीएमके के अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा और अन्य छोटे दलों के सांसद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। संविधान संशोधन जैसे अहम विधेयक के लिए सरकार छोटे दलों और क्षेत्रीय पार्टियों से समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती है।

महिला आरक्षण विधेयक का महत्व

महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लागू करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की समयसीमा और परिसीमन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाता रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाना चाहिए और इसे जनगणना व परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है।

फिलहाल सरकार की नजरें संख्या बल पर टिकी हैं। एनसीपी (शरद पवार गुट) के समर्थन के बाद समीकरण कुछ बदले हैं, लेकिन डीएमके और झामुमो जैसे दलों का फैसला यह तय करेगा कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक संसद में किस दिशा में जाएगा।

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