CEC के खिलाफ डीके शिवकुमार की हुंकार, SIR विरोधियों पर पुलिस का प्रहार!
SIR के खिलाफ प्रदर्शन पड़ा भारी, 100 लोगों को पुलिस ने पकड़ा
बेंगलुरु/नई दिल्ली। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर देश में विरोध तेज हो गया है। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सामने उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब एक तरफ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु में इसी मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की। सोमवार, 12 अक्टूबर को कम से कम 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
बेंगलुरु में छात्र संगठनों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों ने SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था। प्रदर्शनकारियों की योजना मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक मार्च निकालकर ज्ञापन सौंपने की थी। उनकी मांग थी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया रद्द की जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें।
प्रदर्शनकारी केआर सर्कल के आसपास एकत्र हुए थे। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया। इस दौरान कई लोगों को पुलिस वाहनों में बैठाकर हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता आकार पटेल भी शामिल बताए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप
पुलिस की कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद छात्रों, महिलाओं और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की की गई। कुछ पुलिसकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में बैठाने का भी आरोप है।
घटना की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों और फोटोग्राफरों के साथ भी कथित बदसलूकी की शिकायतें सामने आई हैं। इसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।हालांकि, बेंगलुरु पुलिस ने कार्रवाई को एहतियाती कदम बताया। सेंट्रल डिवीजन के पुलिस उपायुक्त अक्षय एम हाके के अनुसार, प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के एकत्र हुए थे। उन्हें निर्धारित प्रदर्शन स्थल फ्रीडम पार्क जाने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।
डीके शिवकुमार ने पुलिस कार्रवाई पर मांगी रिपोर्ट
बेंगलुरु में हुई घटना को लेकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट मांगी है। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में अनावश्यक बल प्रयोग या किसी तरह की ज्यादती सामने आती है, तो संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का मौलिक अधिकार है। दिल्ली में जिस अधिकार की मांग की जा रही है, उसी अधिकार से बेंगलुरु में लोगों को वंचित नहीं किया जा सकता।
वहीं, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी पुलिस अधिकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में अनावश्यक बाधा नहीं डालने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की समीक्षा करने की बात कही है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस सरकार के सामने राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस कार्रवाई की रिपोर्ट और उसमें सामने आने वाले तथ्यों पर नजर बनी हुई है।