Delhi दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर हिरासत में लिए गए CJP नेता अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि उन्होंने ऐसा कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है, जिसमें प्रदर्शन नहीं करने की शर्त रखी गई हो। दिपके ने स्पष्ट कहा कि वे एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। उनके इस बयान के बाद बॉन्ड की शर्तों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।



 



एक बड़े टीवी चैनल पर अभिजीत दिपके ने दावा किया कि उन्होंने कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है। वहीं, दूसरी ओर एक चैनल पर कथित तौर पर साइन किया हुआ बॉन्ड दिखाए जाने की चर्चा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सच क्या है और कौन सही बोल रहा है? सोशल मीडिया पर बॉन्ड की एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, लेकिन इसकी असलियत को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। वायरल पोस्ट असली है या नकली, इसका खुलासा आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल मामले को लेकर चर्चाएं जारी हैं।

दिल्ली कैंट की अदालत से रिहा हुए तीनों नेता
जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। इसके बाद तीनों को रिहा कर दिया गया। शांति और अच्छे व्यवहार को बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपये का जमानती बॉन्ड जमा कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। तीनों नेताओं को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचने वाली फ्लाइट के उतरने के बाद विमान के अंदर ही हिरासत में लिया गया था। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त का दावा
CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों नेताओं को इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। वहीं, दिपके ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि उन्होंने प्रदर्शन नहीं करने से संबंधित कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है। यहीं से पूरे मामले में सवाल उठ रहे हैं कि बॉन्ड में वास्तव में क्या शर्तें दर्ज हैं और क्या उसमें प्रदर्शन नहीं करने का कोई उल्लेख है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन दोनों बातों को एक ही शर्त मानना उचित नहीं होगा।

दिल्ली पुलिस ने एहतियाती हिरासत की दी थी जानकारी
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने बताया था कि तीनों नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और धारा 170 के तहत कार्रवाई की थी। ये प्रावधान शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा और संज्ञेय अपराध को रोकने के उद्देश्य से की जाने वाली कार्रवाई से संबंधित हैं।
वायरल बॉन्ड को लेकर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर कथित बॉन्ड की पोस्ट वायरल होने और अलग-अलग दावों के सामने आने के बाद इसकी प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वायरल पोस्ट असली है या नकली, इसकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। फिलहाल अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। बॉन्ड की वास्तविक शर्तों और उस पर हस्ताक्षर को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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