Uttarakhand उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को देहरादून में पारंपरिक त्योहार ‘इगास बग्वाल’ (Igas Festival) बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि इगास पर्व उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपरा और सामूहिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की कि वे अपने त्योहारों और लोक परंपराओं को सहेजें ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने पारंपरिक परिधान पहना और स्थानीय लोकगीतों और ढोल-दमाऊं की थाप पर ग्रामीणों के साथ नृत्य किया। मुख्यमंत्री आवास परिसर में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, प्रशासनिक अधिकारी, विद्यार्थी और सांस्कृतिक दलों के सदस्य मौजूद रहे।
उन्होंने कहा, “हमारे त्योहार हमारी पहचान हैं, इन्हें मनाना केवल परंपरा नहीं बल्कि अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का प्रतीक है। इगास पर्व को उत्तराखंड में दीपावली के 11वें दिन मनाया जाता है। इसे ‘ग्यारस’ या ‘देवउठनी एकादशी’ से भी जोड़ा जाता है। इस दिन प्रदेश के लोग घरों में दीप जलाकर, पकवान बनाकर और पारंपरिक गीतों पर नृत्य करते हैं। माना जाता है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खबर हिमालयी क्षेत्रों तक देर से पहुंची थी, इसलिए यहां दीपावली बाद में मनाई जाती है। उसी को ‘इगास’ कहा जाता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए कई योजनाओं पर कार्य कर रही है। ‘एक जनपद एक उत्पाद’ की तर्ज पर पारंपरिक हस्तशिल्प और भोजन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि स्थानीय लोगों की आय बढ़ सके। उन्होंने यह भी कहा कि इगास पर्व को राज्य के हर कोने में उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए ताकि उत्तराखंड की पहचान और अधिक मजबूत हो। समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। ‘छोलिया नृत्य’, ‘झोड़ा’ और ‘थड्या’ नृत्य से वातावरण पूरी तरह पारंपरिक रंग में रंग गया। मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया और प्रदेशवासियों से अपील की कि वे युवाओं को इन पारंपरिक उत्सवों से जोड़ें।