Bhopal. भोपाल। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोपों से घिरे अपने विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) दीपम रायचूरा को प्रभार से हटा दिया है। यह कार्रवाई शराब ठेकों में कथित अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोप सामने आने के बाद की गई है। उपमुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान शराब ठेकों में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया है।
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि दीपम रायचूरा वर्तमान में उनके OSD के रूप में कार्यरत थे, लेकिन जिस अवधि में कथित अनियमितताओं की बात सामने आई है, उस समय वह भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। वर्ष 2024-25 के दौरान रायचूरा उनके OSD नहीं थे। देवड़ा के मुताबिक, शराब ठेकों से संबंधित गड़बड़ियों की जानकारी उन्हें समाचार पत्र के माध्यम से मिली, जिसके बाद उन्होंने जांच के निर्देश दिए।
पूरा मामला नाइट क्लब, रेस्टोरेंट और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े मोहित गोगिया के कथित बयान से सामने आया है। गोगिया पर करीब 200 लोगों से लगभग 930 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। वह फिलहाल पंजाब की जेल में बंद है। सोशल मीडिया पर वायरल उसके कथित बयान में दीपम रायचूरा पर शराब ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।
कथित बयान के अनुसार, मोहित गोगिया की मुलाकात दीपम रायचूरा से तनुजा सेठी ने कराई थी। उस समय रायचूरा आबकारी विभाग में पदस्थ थे। गोगिया का दावा है कि रायचूरा ने उसे दीपक दुबे नामक व्यक्ति से मिलवाया था। आरोप है कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों का ठेका जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई।
गोगिया के कथित बयान में दावा किया गया है कि शराब ठेके दिलाने के बदले कुल एक करोड़ रुपये दिए गए थे। इनमें 50 लाख रुपये नकद और बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाने का आरोप है। बयान के मुताबिक, नकद राशि दीपक दुबे ने होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्ट लेजा के एक फ्लैट में ली थी। वहीं, शेष 50 लाख रुपये आईएसबीटी के पास स्थित एक होटल के बैंक खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि यह होटल रायचूरा के एक मित्र का है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मोहित गोगिया ने अपने कथित बयान में शराब ठेकों के लिए इस्तेमाल की गई फर्जी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) को मंजूरी दिलाने में मदद करने का भी आरोप लगाया है। उसका दावा है कि शराब दुकानों के ठेके के लिए आवश्यक बैंक गारंटी से संबंधित दस्तावेजों को गलत तरीके से स्वीकार कराया गया। इसके अलावा कथित बयान में बिना लाइसेंस शराब की आपूर्ति का भी जिक्र किया गया है। गोगिया के अनुसार, दीपम रायचूरा ने उसकी मुलाकात गौरव शिवहरे से कराई थी। इसके बाद गौरव ने उसे कारोबारी अमरीक सिंह से मिलवाया। आरोप है कि अमरीक सिंह ने टीटी नगर की शराब दुकानों से बिना लाइसेंस शराब बिकवाने में मदद की।
गोगिया के कथित बयान में सोल क्लब के संचालन के दौरान पुलिस अधिकारी राजेश मिश्रा से संपर्क होने की बात भी कही गई है। उसने दावा किया कि जांच एजेंसी की कार्रवाई रुकवाने के नाम पर एक व्यक्ति ने 50 लाख रुपये मांगे थे। कथित तौर पर सिद्धांत ओझा के माध्यम से संपर्क होने के बाद उसने रकम दी। हालांकि, बयान में राजेश मिश्रा को सीधे रकम मांगने वाला व्यक्ति नहीं बताया गया है। इस मामले में दीपम रायचूरा ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी जांच एजेंसी की ओर से उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है। रायचूरा के अनुसार, भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त के रूप में पदस्थ रहने के दौरान गोगिया से लाइसेंसधारी के तौर पर परिचय हुआ होगा। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया है।
मोहित गोगिया के खिलाफ आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय पहले भी कार्रवाई कर चुके हैं। उसकी संपत्तियां फ्रीज की जा चुकी हैं। अब उसके कथित बयान में सामने आए आरोपों को लेकर जांच की मांग उठी है। फिलहाल उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दीपम रायचूरा को OSD के प्रभार से हटा दिया है और शराब ठेकों में कथित अनियमितताओं की जांच के निर्देश दिए हैं। मामले में आरोपों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।