काठमांडू: नेपाल में एक बार फिर हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग जोर पकड़ने लगी है। देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने और राजशाही की बहाली को लेकर कई संगठन और समर्थक लगातार आवाज उठा रहे हैं। हाल के दिनों में इस मुद्दे को लेकर नेपाल में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।

नेपाल वर्ष 2008 तक दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र था। राजशाही खत्म होने के बाद देश को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद से ही कुछ समूह लगातार नेपाल की पुरानी धार्मिक पहचान और राजशाही व्यवस्था को वापस लाने की मांग करते रहे हैं। हालिया दिनों में हिंदू राष्ट्र समर्थक अभियानों में युवाओं की भागीदारी भी चर्चा में रही है। सोशल मीडिया और सड़कों पर कई समूह नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग उठा रहे हैं। समर्थकों का तर्क है कि नेपाल की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को देखते हुए हिंदू राष्ट्र की व्यवस्था वापस आनी चाहिए।
नेपाल में हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग को लेकर कई बड़े आंदोलन हो चुके हैं। इनमें सबसे प्रमुख आंदोलन वर्ष 2025 में देखने को मिला, जब राजशाही समर्थकों ने काठमांडू में बड़े प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने राजशाही की वापसी और नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग उठाई थी।
मार्च 2025 में काठमांडू में राजशाही समर्थक समूहों ने बड़ा प्रदर्शन किया था। इस दौरान हजारों लोग सड़कों पर उतरे और पुरानी व्यवस्था की बहाली की मांग की। प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति भी बनी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी। इसके बाद मई 2025 में भी नेपाल में हिंदू राष्ट्र और राजशाही समर्थकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों, बेरोजगारी और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई थी।
इससे पहले भी नेपाल में समय-समय पर राजशाही समर्थक आंदोलन होते रहे हैं। वर्ष 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद राजा ज्ञानेंद्र समर्थक समूहों ने कई बार संविधान में बदलाव और पुरानी व्यवस्था की वापसी की मांग उठाई। हिंदू राष्ट्र की मांग करने वाले संगठनों का कहना है कि नेपाल की बड़ी आबादी हिंदू धर्म को मानती है और देश की ऐतिहासिक पहचान हिंदू राष्ट्र के रूप में रही है। वहीं, विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि नेपाल का मौजूदा धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ढांचा सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करता है।
नेपाल की राजनीति में यह मुद्दा अब एक बार फिर महत्वपूर्ण बन गया है। कुछ राजनीतिक दल भी हिंदू राष्ट्र और राजशाही के मुद्दे को अपने एजेंडे में शामिल कर रहे हैं। हालांकि नेपाल सरकार की ओर से इस व्यवस्था को वापस लाने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदू राष्ट्र की मांग केवल धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि नेपाल की राजनीति, पहचान और शासन व्यवस्था से जुड़ा विषय बन चुका है। आने वाले समय में यह मुद्दा नेपाल की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
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