लोकसभा में पेश किया गया परिसीमन बिल, सदन में हंगामा, VIDEO

Update: 2026-04-16 05:53 GMT

नई दिल्ली: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश कर दिया है. बिल के लोकसभा में पेश करते ही कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल का विरोध किया तो सदन में हंगामा शुरू हो गया.

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परिसीमन पर दक्षिण भारतीय राज्यों को क्या है डर, क्या है आपत्ति?
दक्षिण भारत के कई राज्यों को डर है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा होने से उनकी राष्ट्रीय स्तर पर ताकत कम हो सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि सभी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी, जिससे संतुलन बना रहेगा. फिर भी, क्षेत्रीय दल इसे अपने प्रभाव में संभावित कमी के रूप में देख रहे हैं. कुल मिलाकर, ये सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने वाला कदम है. असल में, ये कहानी 2023 से शुरू होती है, जब संसद ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पारित किया था.
इस कानून में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान तो था, लेकिन इसे लागू करने के लिए पहले नई जनगणना और परिसीमन जरूरी बताया गया था. इसी कारण कई लोगों को लगा कि इस बदलाव को जमीन पर उतरने में काफी समय लग सकता है. लेकिन हर कहानी में एक दूसरा पक्ष भी होता है. जैसे ही ये विधेयक सामने आए, विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना है कि यह कदम पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले महिलाओं को आकर्षित करने की कोशिश है और इसे उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति बताया. अब सबकी नजरें उस विशेष संसद सत्र पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि ये प्रस्ताव कानून बनते हैं या नहीं.
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