मानहानि केस: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अदालत जाने की घोषणा की है। कोयला तस्करी मामले में उनकी कथित 'संलिप्तता' को लेकर ममता बनर्जी को भेजे गए मानहानि नोटिस की समय सीमा खत्म होने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि वे कानूनी कार्रवाई के लिए कोर्ट का रुख करेंगे।
सुवेंदु अधिकारी ने वकील के जरिए पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नोटिस भेजा था, जिसमें उनसे 72 घंटे के भीतर मामले में सभी कथित सबूत पेश करने को कहा। इसके साथ ही, सुवेंदु अधिकारी की तरफ से दीवानी और आपराधिक मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी गई थी। नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने बुधवार सुबह घोषणा की कि वह मुख्यमंत्री के खिलाफ अदालत का रुख करेंगे।
सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार सुबह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "ममता बनर्जी पूरी तरह घबराई हुई नजर आ रही हैं। मेरी ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस में दी गई समयसीमा अब समाप्त हो चुकी है और फंसी हुई स्थिति के कारण वह कोई जवाब नहीं दे पाईं। मुख्यमंत्री ने अपने व्यवहार से यह साफ कर दिया है कि कोयला घोटाले में मेरे शामिल होने के उनके मनगढ़ंत आरोप उनकी खराब मानसिकता का नतीजा थे।"
उन्होंने आगे लिखा, "अदालत में कानूनी परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। ममता बनर्जी, मैं आपसे कोर्ट में मिलूंगा।" सुवेंदु अधिकारी ने यह मानहानि नोटिस मुख्यमंत्री के हालिया सार्वजनिक बयानों के बाद भेजा था, जिनमें ममता बनर्जी ने कहा था, "पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी के मामले की रकम सुवेंदु अधिकारी और भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री तक पहुंची।"
इससे पहले, सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक वीडियो को लेकर भी निशाना साधा। यह तथाकथित वीडियो ममता बनर्जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का था। नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "राज्य के प्रशासनिक कार्यालय से पत्रकार सम्मेलन करते समय और उनके सोशल मीडिया प्रसारण के दौरान तृणमूल कांग्रेस का पार्टी गाना बजाया जा रहा है। वह प्रशासनिक दफ्तर से राजनीतिक बयान देती हैं या अन्य राजनीतिक दलों पर हमला करती हैं। यह सब जानबूझकर करती हैं, यह बात सभी जानते हैं। लेकिन हालात अब ऐसे हो गए हैं कि यह समझना मुश्किल हो गया है कि वह राज्य का प्रशासनिक दफ्तर है या तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय।"