मौसम की मार से सेब उत्पादन में गिरावट

Update: 2026-06-27 10:46 GMT
Shimla. शिमला। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सेब उद्योग को इस वर्ष मौसम की मार झेलनी पड़ी है, जिससे उत्पादन में गिरावट आई है। बागबानी विभाग के ताजा आकलन के अनुसार प्रदेश में इस बार केवल 2 करेड़ 18 लाख 35 हजार 350 पेटियों के उत्पादन का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 3 करोड़ 49 लाख 93 हजार 800 पेटियों की तुलना में 1 करोड़ 31 लाख 58 हजार 450 पेटियों की भारी गिरावट है। उत्पादन में आई यह कमी न केवल लाखों बागबानों की आय को प्रभावित करेगी, बल्कि मंडियों, पैकेजिंग, परिवहन, मजदूरी और पूरे सेब कारोबार पर भी व्यापक असर डालेगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं होने से सेब के पौधों को आवश्यक चिलिंग आवर्स
नहीं मिल पाए।


इसके बाद वसंत ऋतु में तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव, ओलावृष्टि, तेज हवाओं और बेमौसम बारिश ने फूलों और शुरुआती फलों को नुकसान पहुंचाया। निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी के कारण फल की सेटिंग भी कमजोर रही। बागबानी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस बार भी शिमला जिला सबसे बड़ा सेब उत्पादक रहेगा, जहां 1 करोड़ 15 लाख 49 हजार 500 पेटियों के उत्पादन का अनुमान है। इसके बाद कुल्लू में 37 लाख 60 हजार 500, किन्नौर में 28 लाख 18 हजार, मंडी में 22 लाख 83 हजार 300, चंबा में 10 लाख 16 हजार 900, सिरमौर में 2 लाख 67 हजार तथा लाहुल-स्पीति में 1 लाख 9 हजार 200 पेटियों का अनुमान है। कांगड़ा, सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना में उत्पादन अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। शिमला में प्रशासन ने सेब सीजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने समीक्षा बैठक में परिवहन, यातायात प्रबंधन, मालभाड़ा निर्धारण, नियंत्रण कक्षों की स्थापना, पैकेजिंग सामग्री और श्रमिकों की उपलब्धता सहित सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि बागबानों को सीजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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