Mumbai मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा में पेश 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य का कुल बकाया सार्वजनिक कर्ज 11.1% की वृद्धि के साथ ₹9.32 लाख करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। यह उधारी मुख्य रूप से अवसंरचना परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए लिया गया। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया कि राज्य का ऋण-से-जीएसडीपी (Debt-to-GSDP) अनुपात 18.3% पर है, जो FRBM (Fiscal Responsibility and Budget Management) की 25% सीमा के भीतर सुरक्षित माना जा रहा है।
सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में सार्वजनिक कर्ज में यह बढ़ोतरी आवश्यक निवेश और सामाजिक योजनाओं के विस्तार के कारण हुई है। इसके बावजूद, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए राज्य ने विभिन्न उपाय किए हैं ताकि ऋण स्थिरता बनी रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज वृद्धि को गंभीर समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इसका अनुपात जीएसडीपी के मुकाबले अभी भी सुरक्षित स्तर पर है। सरकारी निवेश से रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और नागरिक कल्याण योजनाओं के प्रभाव में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार ने 2025-26 के बजट के तहत भी इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में अधिक व्यय की योजना बनाई है। आर्थिक सर्वेक्षण में संकेत दिया गया कि भविष्य में राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए कर्ज प्रबंधन और राजस्व वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया कि उधारी से उत्पन्न वित्तीय दबाव को संतुलित करने के लिए नियमित राजस्व प्रवाह, निवेश वापसी और वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया जाएगा।