लाशों का सड़क में किया जा रहा अंतिम संस्कार, श्मशान घाट बाढ़ की चपेट में आया
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इसके अलावा बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। लोगों का कहना है कि वे दूर-दराज से आते हैं और अंत्येष्टि के लिए दो से तीन घंटे इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान उन्हें बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं मिल रही। कई यात्रियों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के बावजूद श्मशान घाट पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
इस मामले पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी धीरेंद्र कुमार राय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में शुद्ध पेयजल के लिए टैंकर लगाए गए हैं। सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है ताकि संक्रमण का खतरा न हो। श्मशान घाट की समस्या पर उन्होंने कहा कि चिताओं की राख को नष्ट करने का कार्य भी नगर पालिका द्वारा कराया जाएगा।
लोग प्रशासन की कोशिशों को नाकाफी मान रहे हैं। बाढ़ के इस कहर ने न केवल लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि मृतकों की अंतिम विदाई को भी कठिन बना दिया है। जिला प्रशासन से मांग की जा रही है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।