कांग्रेस जन प्रतिनिधियों एंव सरपंचों ने भेजें मुख्यमंत्री, प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफें

Update: 2023-09-29 13:52 GMT
भीलवाड़ा। भीलवाड़ा में अपनी पार्टी के खिलाफ पूर्व विधायक और पंचायत समिति के प्रधान सहित 100 से अधिक प्रमुख कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है भीलवाड़ा कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष रामपाल शर्मा तो यहां तक बोले कि हमें अपना मुंह काला करवाने का शौक नहीं है। मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से जुड़ी हुई अब 16 ग्राम पंचायत के कांग्रेस कार्यकर्ता जिला सीमांकन को लेकर अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया हैं। दरअसल भीलवाड़ा के सर्किट हाउस में मीडिया से मुखातिब होते हुए कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष रामपाल शर्मा, पूर्व विधायक प्रदीप कुमार सिंह, प्रधान जितेंद्र कुमार मूंदड़ा, सहित सभी 16 ग्राम पंचायत के सरपंच कांग्रेस के प्रमुख सो कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी से सशर्त इस्तीफा दे दिया है। इस विरोध का मुख्य कारण भीलवाड़ा जिले से अलग कर नए बनाए गए शाहपुर जिले में मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायत को शामिल करना है यह ग्राम पंचायते शाहपुरा जिले में शामिल नहीं होना चाहती है। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष रामपाल शर्मा ने मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नए जिलों की घोषणा के बाद से ही मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 16 ग्राम पंचायत नवगठित शाहपुर जिले में शामिल नहीं होना चाहती है। इसके लिए लोगों ने धरना भी दिया हम सब पदाधिकारी ने उन्हें आश्वासन देकर धरने से तो उठा दिया मगर उनकी मांग अभी तक पूरी नहीं हुई यहां तक की 27 सितंबर को पंचायत राज विभाग के आदेश में साफ हो गया है कि यह सभी ग्राम पंचायत शाहपुर जिले में ही रहेगी।
अब ऐसी स्थिति में इन ग्राम पंचायत में कांग्रेस के नेताओं का जाना नामुमकिन है क्योंकि हम गांव में जाएंगे तो लोग हमारा मुंह काला कर देंगे जिसका हमें शौक नहीं है इसलिए हम कांग्रेस पार्टी से इस शर्त पर इस्तीफा दे रहे हैं या तो आचार संहिता लगने तक हमारी मांग पूरी कर ले नहीं तो हम सभी पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। शर्मा ने आगे कहा की हमारी शालीनता को हमारी कमजोरी न समझे हम उग्र आंदोलन करेंगे। शर्मा ने मीडिया से साफ कहा कि इन सारी घटनाओं से अकेले मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि संपूर्ण जिले की सातो सीटो पर कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सीएम अशोक गहलोत, राजस्व मंत्री रामलाल जाट, लोकसभा प्रभारी नीरज शर्मा के सामने भी अपनी मांग रखी थी लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और पूर्व पंचायत समिति प्रधान प्रदीप कुमार सिंह ने कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ होने के बावजूद आगामी चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ेगा। सिंह ने कहा कि मांडलगढ़ में कांग्रेस के ही नेता अपने लोगों के साथ षड़यंत्र कर रहे हैं। इसी कारण से कांग्रेस का गढ़ होते हुए भी मांडलगढ़ सीट पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस से इस्तीफा देने वालों में प्रमुख रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष व लोकसभा प्रत्याशी रामपाल शर्मा, पूर्व विधायक और पूर्व प्रधान प्रदीप कुमार सिंह, वर्तमान प्रधान जितेंद्र मुंद्डा, पूर्व प्रधान सतीश जोशी, पूर्व प्रधान कन्हैयालाल जाट, पूर्व उप प्रधान भैरूलाल जाट, कांग्रेस के पूर्व ब्लाक अध्यक्ष शिवकुमार त्रिपाठी सहित माण्डलगढ़ कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष, सभी 16 ग्राम पंचायतों के सरपंच, कांग्रेस के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, कांग्रेस प्रदेश प्रभारी और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को अपने इस्तीफे भेजे है। 16 पंचायतों को शाहपुरा जिले में सम्मिलित करने के मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष देखा गया। अपनी मांग को लेकर लोगों ने गांवों में जगह जगह मतदान के विरोध में बड़े होर्डिंग व बैनर लगा दिए हैं। मानपुरा सरपंच चंदा देवी प्रजापत, मांडलगढ़ संघर्ष समिति के अध्यक्ष महावीरप्रसाद पाराशर ने बताया कि हम सरकार से किसी प्रकार के विकास के लिए धन नहीं मांग रहे। हम पूर्व की भांति भीलवाड़ा जिले में ही रहना चाहते हैं। मानपुरा, रलायता, दौलपुरा, जसूजी का खेड़ा पंचायत के ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार करने को लेकर शपथ ली एवं पंचायत स्तर पर प्रदर्शन कर रोष प्रकट किया।
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