New Delhi. नई दिल्ली। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रस्तावित अंतिम संस्कार समारोह के लिए भारत के राजनीतिक और सरकारी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजे जाने के बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को भी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई तक ईरान और इराक के विभिन्न शहरों में आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान कई देशों के प्रतिनिधिमंडल, राजनीतिक नेता और अन्य गणमान्य व्यक्ति श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंच सकते हैं। निमंत्रण मिलने के बाद कांग्रेस के भीतर इस पर चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस संबंध में अंतिम निर्णय लेंगे। यह भी तय किया जाएगा कि कांग्रेस की ओर से कौन-कौन नेता प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे और ईरान की यात्रा करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार की ओर से भी एक प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी। इन हमलों में उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए थे। बताया जा रहा है कि सुरक्षा और अन्य परिस्थितियों के कारण अब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका था। अब अगले सप्ताह व्यापक स्तर पर अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी की गई है।
सूत्रों का कहना है कि इस कार्यक्रम में दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इसे ईरान के हालिया इतिहास के सबसे बड़े राजकीय आयोजनों में से एक माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया। बताया गया है कि हालिया हमलों में वह भी घायल हुए थे और उनका उपचार जारी है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार होने की जानकारी भी सामने आई है।
कांग्रेस की ओर से अब इस बात पर नजर रहेगी कि पार्टी इस निमंत्रण को स्वीकार करती है या नहीं। यदि प्रतिनिधिमंडल भेजा जाता है तो उसमें किन नेताओं को शामिल किया जाएगा, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। वहीं केंद्र सरकार की ओर से भी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। यह घटनाक्रम भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि भारतीय प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो यह दोनों देशों के बीच पारंपरिक संबंधों और राजनयिक संवाद का हिस्सा होगा। फिलहाल सभी की नजर कांग्रेस और केंद्र सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।