Bilaspur. बिलासपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार अपने संसाधनों को आधुनिक बना रहा है। इसी कड़ी में संस्थान ने ऑर्थोपेडिक्स विभाग के लिए अत्याधुनिक पेल्विस इंस्ट्रूमेंट खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन उपकरणों के उपलब्ध होने के बाद पेल्विस और कूल्हे की जटिल चोटों से जुड़े ऑपरेशन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सटीक और प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। जानकारी के अनुसार सडक़ दुर्घटनाओं, ऊंचाई से गिरने और अन्य गंभीर हादसों में होने वाले पेल्विस फ्रैक्चर चिकित्सा विज्ञान की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटों में शामिल हैं। ऐसे मामलों में सामान्य सर्जिकल उपकरण पर्याप्त नहीं होते, बल्कि विशेष रूप से विकसित पेल्विस इंस्ट्रूमेंट की आवश्यकता होती है।
इनकी सहायता से सर्जन टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में स्थापित कर प्लेट और स्क्रू लगाने जैसी जटिल प्रक्रियाओं को अधिक सटीकता के साथ पूरा कर पाते हैं। एम्स बिलासपुर की यह पहल क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है। आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता से हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ सहित आसपास के राज्यों से आने वाले मरीजों को भी उन्नत ऑर्थोपेडिक उपचार की सुविधा मिलेगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऑर्थोपेडिक्स विभाग की सर्जिकल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा जटिल हड्डी संबंधी ऑपरेशन आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किए जा सकेंगे। एम्स प्रबंधन का मानना है कि अत्याधुनिक पेल्विस इंस्ट्रूमेंट की उपलब्धता से संस्थान की ट्रॉमा और ऑर्थोपेडिक सेवाएं और अधिक सशक्त होंगी। यह कदम न केवल मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने में सहायक होगा, बल्कि एम्स बिलासपुर को उत्तर भारत के प्रमुख ट्रॉमा एवं ऑर्थोपेडिक उपचार केंद्रों में और मजबूत पहचान दिलाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।