निकाय चुनाव: कहीं टिकट नहीं मिलने पर मारपीट, कहीं मंत्री के गले लगकर रोए कार्यकर्ता
टिकट नहीं मिलने का गुस्सा जिलाध्यक्ष पर निकला...
नई दिल्ली: राजस्थान में निकाय चुनाव के लिए टिकटों का बंटवारा होते ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी अलग-अलग रूप में सामने आने लगी है। टिकट की उम्मीद लगाए बैठे कई कार्यकर्ताओं को जब पार्टी की सूची में जगह नहीं मिली तो कहीं गुस्सा फूट पड़ा, कहीं भावनाएं आंसुओं में बदल गईं। वहीं दौसा में टिकट को लेकर बिल्कुल अलग मामला सामने आया, जहां जिस महिला का नाम उम्मीदवारों की सूची में शामिल हुआ, उसे खुद इसकी जानकारी नहीं थी। बीकानेर, जोधपुर और दौसा की इन घटनाओं ने टिकट बंटवारे की अलग-अलग तस्वीर सामने रख दी है।
बीकानेर में टिकट नहीं मिलने का गुस्सा जिलाध्यक्ष पर निकला
बीकानेर में टिकट नहीं मिलने से नाराज एक कार्यकर्ता और उसके साथियों ने कांग्रेस पदाधिकारी मदन गोपाल मेघवाल के साथ मारपीट कर दी। बताया गया कि यह घटना कार्यालय से बाहर सीढ़ियों पर हुई। नाराज कार्यकर्ता और उसके साथ आए लोगों ने मेघवाल को निशाना बनाया और कुछ ही समय में उनके साथ कई थप्पड़ मारे। इसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
टिकट बंटवारे के बाद सामने आई इस घटना ने पार्टी के भीतर नाराजगी की स्थिति को उजागर किया है। टिकट नहीं मिलने से असंतोष होना अलग बात है, लेकिन इस तरह मारपीट तक पहुंच जाना मामले को गंभीर बना देता है। बीकानेर की घटना में टिकट का विवाद सीधे कांग्रेस पदाधिकारी तक पहुंच गया।
जोधपुर में टिकट नहीं मिला तो छलक पड़े आंसू
जोधपुर में टिकट को लेकर सामने आई तस्वीर बीकानेर से बिल्कुल अलग रही। यहां टिकट नहीं मिलने से एक कार्यकर्ता भावुक हो गया और उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उस समय उसके सामने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद थे।
कार्यकर्ता खुद को रोक नहीं पाया और शेखावत के गले लगकर रोने लगा। केंद्रीय मंत्री ने भी उसे संभाला, गले लगाया और सांत्वना दी। इस दौरान टिकट नहीं मिलने का दुख उसके चेहरे पर साफ दिखाई दिया। कुछ देर बाद सांत्वना मिलने पर उसके चेहरे पर मुस्कान भी लौटती नजर आई।
इस तरह टिकट नहीं मिलने के बाद बीकानेर और जोधपुर में बिल्कुल अलग तस्वीर देखने को मिली। बीकानेर में नाराजगी मारपीट तक पहुंच गई, जबकि जोधपुर में कार्यकर्ता ने अपना दर्द आंसुओं के जरिए जाहिर किया।
दौसा में टिकट मिला, लेकिन उम्मीदवार को ही खबर नहीं
दौसा में टिकट बंटवारे से जुड़ा मामला और भी अलग रहा। बीजेपी की टिकट सूची में साहिबा दीदी का नाम शामिल हो गया, लेकिन उन्हें इस बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
बताया गया कि साहिबा दीदी ने टिकट के लिए आवेदन नहीं किया था। उन्होंने नामांकन भी नहीं भरा था और चुनाव लड़ने की तैयारी भी नहीं कर रही थीं। इसके बावजूद टिकट सूची में उनका नाम उम्मीदवार के तौर पर आ गया। बाद में उन्हें इस बात की जानकारी हुई तो पूरा मामला सामने आया।
आमतौर पर चुनाव में टिकट पाने के लिए नेता और कार्यकर्ता लगातार प्रयास करते हैं। दावेदार पार्टी के भीतर अपनी दावेदारी रखते हैं और टिकट के लिए कोशिश करते हैं। लेकिन दौसा में सामने आया मामला इसके बिल्कुल उलट रहा, जहां उम्मीदवार ने टिकट के लिए आवेदन तक नहीं किया और फिर भी उसका नाम सूची में शामिल हो गया।
राजस्थान के निकाय चुनाव में टिकटों के ऐलान के बाद सामने आई इन घटनाओं में नाराजगी और भावनाओं के अलग-अलग रंग दिखाई दिए हैं। बीकानेर में टिकट नहीं मिलने का गुस्सा मारपीट तक पहुंचा, जोधपुर में कार्यकर्ता मंत्री के गले लगकर रो पड़ा और दौसा में बिना आवेदन किए ही एक महिला का नाम उम्मीदवारों की सूची में आ गया। टिकट बंटवारे के बाद सामने आए ये मामले फिलहाल राजस्थान की चुनावी हलचल में चर्चा का विषय बने हुए हैं।