नई दिल्ली: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान क्षेत्र में तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने दुबई जा रहे एक यात्री के पास से लगभग 22.08 लाख रुपए की विदेशी करेंसी पकड़ी।
सीआईएसएफ के मुताबिक, यात्री की पहचान 30 अगस्त को सीआईएसएफ की चेक-इन इन्वेस्टिगेशन विंग (सीआईडब्ल्यू) के जवानों ने व्यवहार और प्रोफाइलिंग के आधार पर की थी। यात्री फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड-442 से दुबई जा रहा था। जांच के दौरान सीआईएसएफ जवानों ने यात्री के हैंड बैगेज में छिपाकर रखे गए 85,000 यूएई दिरहम बरामद किए, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 22.08 लाख रुपए थी।
पकड़े जाने के बाद, यात्री को बरामद विदेशी करेंसी और सामान के साथ आगे की जांच और जरूरी कानूनी कार्रवाई के लिए कस्टम अधिकारियों को सौंप दिया गया। सीआईएसएफ ने कहा कि यह घटना एविएशन सिक्योरिटी को मजबूत करने और एयरपोर्ट के जरिए कीमती सामान की गैरकानूनी आवाजाही को रोकने में उसके जवानों की सतर्कता, मुस्तैदी और प्रोफेशनल समझ को दिखाती है।
यह घटना 20 अगस्त को आईजीआई एयरपोर्ट पर दो यात्रियों से 68.53 लाख रुपए का बिना हिसाब-किताब वाला कैश बरामद होने के कुछ दिनों बाद हुई है। उस मामले में, रैंडम एक्स-बीआईएस, एएसजी दिल्ली में तैनात सीआईएसएफ जवानों ने व्यवहार को देखने और बाद में सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद कैश पकड़ा था। शक होने पर, एक यात्री की डिटेल स्क्रीनिंग की गई, जिसके बाद सीसीटीवी फुटेज से जवानों को उसके साथ यात्रा कर रहे दूसरे यात्री की पहचान करने में मदद मिली।
दोनों यात्री गुवाहाटी और वहां से अगरतला जा रहे थे। उनके सामान की डिटेल स्क्रीनिंग के दौरान, सीआईएसएफ जवानों ने कुल 68,53,500 रुपए का कैश बरामद किया। यात्रियों को कैश, सामान और यात्रा से जुड़े जरूरी कागजात के साथ आगे की जरूरी कार्रवाई के लिए इनकम टैक्स अधिकारियों को सौंप दिया गया।
इससे पहले 17 जुलाई को आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर सीआईएसएफ जवानों ने सिक्योरिटी स्क्रीनिंग के दौरान संदिग्ध व्यवहार देखने के बाद कोलकाता जा रहे एक यात्री को रोका था। डिटेल तलाशी में यात्री के कपड़ों में छिपाकर रखा गया 1.210 किलोग्राम सोना और 1,97,200 रुपए का बिना हिसाब-किताब वाला कैश बरामद हुआ था।
यात्री बरामद सामान के लिए सही दस्तावेज नहीं दिखा पाया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दे पाया। उसने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ड्यूटी पर मौजूद सीआईएसएफ कर्मियों को प्रभावित करने की कोशिश की। हालांकि, कर्मियों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और तुरंत मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी।