कुल्लू। डीएवी पब्लिक स्कूल मौहल कुल्लू में जूनियर विभाग विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस विज्ञान प्रदर्शनी में कक्षा पहली से सातवीं तक के विद्यार्थियों ने बढ़ . चढक़र भाग लिया। विज्ञान प्रदर्शनी के अवसर पर मुख्य अतिथि इंजीनियर विनोद देवी चंद जी ;स्कूल प्रबंधकद्ध शामिल रहे। उनके द्वारा रिब्बन काटकर इस विज्ञान प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार तथा रचनात्मक सोच का विकास करना था। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े अनेक आकर्षक एवं उपयोगी मॉडल प्रस्तुत किए। इनमें सौर मंडलएवर्षा जल संचयन, स्मार्ट सिटी, हाइड्रोलिक लिफ्ट, प्रदूषण नियंत्रण, रोबोटिक्स, जल एवं ऊर्जा संरक्षण तथा पर्यावरण सुरक्षा, ऑटोमैटिक स्ट्रीट लाइट, श्वसन तंत्र प्रणाली, कोशिका का मॉडल, रॉकेट लॉन्चिंग मॉडल, मंगलयान, फायर अलार्म सिस्टम, रेशम के कीट का जीवनचक्र, ज्वालामुखी, खाद्य श्रृंखला,जल वितरक, जल चक्रख् विद्युत परिपथ, पवन चक्कीएवायु शीतलक, भूकंप संवेदक,चंद्रयान-3, सौर ऊर्जा, फेफड़े, पाचन तंत्र, मानव नेत्र, बीज अंकुरण, पवन ऊर्जा, श्वसन तंत्र, आंतरिक अंग, बल्ब की शक्ति आदि मॉडल जैसे विषय प्रमुख रहे।
विद्यार्थियों ने अपने मॉडलों का प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शन करते हुए उनके वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं दैनिक जीवन में उपयोगिता की जानकारी भी दी। मुख्यातिथि ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, परिश्रम और वैज्ञानिक सोच की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए यंग साइंटिस्ट कहा। प्रदर्शनी के उत्कृष्ट मॉडलों के विजेता प्रतिभागियों के उत्साहवर्धन के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया जिसमें कक्षा चौथी ब्लू से आयरा हुसैनए कक्षा चौथी ग्रीन से अरनव अरोड़ा, पांचवी ब्लू से करुल, पांचवी ग्रीन से अनामिका, छठी ब्लू से मोहित, छठी ग्रीन से हेयांश, सातवीं ब्लू से अद्विका राणा, सातवीं ग्रीन से अन्वेषा ने पुरस्कार प्राप्त किया। यह आयोजन विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि एवं शोध की भावना विकसित करने में अत्यंत प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। विद्यालयों में आयोजित ऐसी विज्ञान प्रदर्शनियाँ विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार क्षमता को प्रोत्साहित करने का प्रभावी माध्यम मानी जाती हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य आरएस राणा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह जिज्ञासा, प्रयोग और नवाचार की भावना को विकसित करने का माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच अपनाकर समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।