CDS और COAS ने सिविल-मिलिट्री फ्यूजन पर दिया जोर

Update: 2025-10-22 15:01 GMT
Delhi दिल्ली: भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में सिविल-मिलिट्री फ्यूजन की आवश्यकता और महत्व पर विशेष जोर दिया। दोनों सैन्य नेताओं ने माना कि आज के बदलते सुरक्षा माहौल में नागरिक और सैन्य तंत्र के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा की मजबूती के लिए अनिवार्य है। इस अवसर पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में, दोनों वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भारत में रक्षा और नागरिक प्रशासन के बीच रणनीतिक समन्वय को लेकर अपने दृष्टिकोण साझा किए। उन्होंने बताया कि केवल सैन्य ताकत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है; बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा में नागरिक एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और सेना के बीच एकीकृत दृष्टिकोण आवश्यक है।
CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं पर सेना की उपस्थिति से नहीं सुनिश्चित होती। इसमें नागरिक प्रशासन, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न सरकारी एजेंसियों का सक्रिय सहयोग भी आवश्यक है। हमें यह समझना होगा कि सिविल-मिलिट्री फ्यूजन से संकट के समय तेजी से निर्णय लेने और प्रभावी प्रतिक्रिया संभव होती है। COAS जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा कि आज की चुनौतियों में सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर खतरे और प्राकृतिक आपदाओं का समेकित दृष्टिकोण जरूरी है। उन्होंने बताया कि सेना और सिविल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल से न केवल आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है, बल्कि जनता का भरोसा और सहयोग भी बढ़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का अर्थ केवल युद्ध और रणनीति तक सीमित नहीं है। इसमें सुरक्षा नीतियों का निर्माण, संकट प्रबंधन, तकनीकी सहयोग और सामरिक जानकारी का साझा उपयोग शामिल है। यह दृष्टिकोण भारत की सुरक्षा प्रणाली को अधिक गतिशील और प्रभावी बनाता है। बैठक में विभिन्न सुरक्षा मामलों पर भी चर्चा हुई, जिसमें सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा और नई तकनीकों के उपयोग को लेकर सुझाव दिए गए। अधिकारियों ने जोर दिया कि इस दिशा में नियमित अभ्यास और साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आवश्यक हैं, ताकि नागरिक और सैन्य तंत्र के बीच तालमेल में निरंतर सुधार हो सके।
सैन्य और सिविल अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में कई घटनाओं में यह तालमेल कारगर साबित हुआ। चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो, आतंकी हमले का खतरा हो या सीमा पर तनाव, बेहतर समन्वय ने समय पर प्रभावी कार्रवाई को संभव बनाया। बैठक के अंत में CDS और COAS ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में भारत की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सिविल-मिलिट्री फ्यूजन को और मजबूती देने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास केवल रक्षा मंत्रालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी संबंधित सरकारी विभाग और एजेंसियां इसमें शामिल होंगी।
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