नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति की तलाक की याचिका खारिज कर दी है. व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उसे काले रंग और मोटे शरीर वाला बताती थी. कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को तलाक देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता.
जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. फैमिली कोर्ट ने व्यक्ति की तलाक की याचिका खारिज कर दी थी और उसकी पत्नी की ओर से दायर स्त्रीधन यानी उसके माता-पिता की ओर से दिए गए उपहार और संपत्ति वापस करने की याचिका को मंजूर किया था.
हाई कोर्ट ने 25 जून को मामले में फैसला सुरक्षित रखा था और 18 सितंबर को फैसला सुनाया. जांजगीर-चांपा जिले के रहने वाले 28 वर्षीय अक्ष घोष ने 28 अगस्त 2024 को जांजगीर स्थित फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी.
अक्ष घोष और रायगढ़ जिले की 25 वर्षीय पूजा सीत की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ जिले के एक गांव में हुई थी. महिला शादी के बाद करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही थी.
पति ने आरोप लगाया था कि इस दौरान पत्नी उसके साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार करती थी, झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और अक्सर मायके चली जाती थी. उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसकी अनुमति के बिना रिश्तेदार की शादी में शामिल होने राजस्थान गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी. पति के मुताबिक, इसके बाद पत्नी का जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया.
पति ने कहा कि इसके बाद महिला की मां उसे रायगढ़ ले गई और उसके बार-बार वापस लाने के प्रयासों के बावजूद वह लौटने के लिए तैयार नहीं हुई. महिला ने शादी के तथ्य को छोड़कर पति के आरोपों से इनकार किया. उसने आरोप लगाया कि उसके पति का दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध था और इसकी जानकारी होने के बाद उसने शराब पीना शुरू कर दिया. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति उसके साथ दुर्व्यवहार करता था और गर्भावस्था के दौरान उसे उचित इलाज भी नहीं दिया गया.
महिला के मुताबिक, बीमार होने पर उसकी मां उसे रायगढ़ के अस्पताल ले गई थी. ठीक होने के बाद उसने पति और उसके परिवार से उसे वापस ले जाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके बाद उसकी मां ने 24 फरवरी 2020 को रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की. महिला ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत भी पति और उसके परिवार के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायगढ़ के समक्ष कार्यवाही शुरू की थी.
हाई कोर्ट ने सबूतों की जांच के बाद कहा कि पति अपनी पत्नी की ओर से क्रूरता और परित्याग साबित करने में विफल रहा. कोर्ट ने कहा कि पति ने पत्नी पर कई आरोप लगाए, लेकिन किसी को भी ठोस सबूत के जरिए साबित नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा पति को काले रंग या मोटे शरीर वाला बताने का आरोप तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि पति यह साबित नहीं कर सका कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के अपने माता-पिता के साथ रह रही थी और वह पत्नी की ओर से वैवाहिक संबंध छोड़ने की मंशा भी साबित नहीं कर सका. हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही मानते हुए तलाक की अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने बिना किसी लागत के अपील खारिज करते हुए डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया.
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