Delhi दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘सेक्रेड टाइगर टेल्स’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि बाघ केवल वन्यजीव नहीं बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि प्रत्येक बाघ की धारियां अलग होती हैं और यही उनकी विशिष्ट पहचान होती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हर जीव को अपनी अलग विशेषता दी है और बाघ इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में बाघों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। बाघ जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में मदद करते हैं। यदि किसी क्षेत्र में बाघों की संख्या और उनका संरक्षण बेहतर होता है तो वहां जैव विविधता भी मजबूत बनी रहती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘सेक्रेड टाइगर टेल्स’ पुस्तक के माध्यम से बाघों की विशेषताओं, उनके जीवन और संरक्षण की जरूरतों को समझाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी किताबें लोगों को प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि आज के समय में प्रकृति से जुड़ना बहुत जरूरी है। जब इंसान प्रकृति के करीब जाता है तो वह संतुलन और संरक्षण की आवश्यकता को बेहतर तरीके से समझ पाता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। लोगों को वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जागरूक होना चाहिए। कार्यक्रम में पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि बाघों का संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि पूरे जंगल और उससे जुड़े जीव-जंतुओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
भारत में बाघ संरक्षण को लेकर कई वर्षों से अभियान चलाए जा रहे हैं। बाघों की संख्या बढ़ाने और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए सरकार और विभिन्न संस्थाएं लगातार काम कर रही हैं। ‘सेक्रेड टाइगर टेल्स’ पुस्तक लॉन्च कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि वन्यजीवों पर आधारित ऐसी पुस्तकें आम लोगों को प्रकृति के महत्व को समझने में मदद करती हैं। इससे आने वाली पीढ़ियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। कार्यक्रम के दौरान बाघों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और मानव-प्रकृति संबंधों पर भी विचार साझा किए गए।
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