Delhi दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद धर्मशिला गुप्ता ने पलटवार किया है, जिसमें खरगे ने कहा था कि "BJP-RSS ने भारत की आजादी के लिए कुछ नहीं किया।" बीजेपी सांसद ने खरगे को कांग्रेस का वरिष्ठ नेता बताते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया, लेकिन उनके बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। धर्मशिला गुप्ता ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के बहुत वरिष्ठ नेता हैं और वह उनका सम्मान करती हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने वरिष्ठ नेता इतिहास को सही तरीके से नहीं पढ़ते हैं। बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि खरगे को यह जानकारी नहीं है कि कांग्रेस के नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्या भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और उस दौर की राजनीतिक गतिविधियों को समझने के लिए इतिहास के तथ्यों को जानना जरूरी है। बीजेपी सांसद ने खरगे के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उन्हें स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े विभिन्न घटनाक्रमों और नेताओं की भूमिका के बारे में जानकारी होनी चाहिए। खरगे के बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच स्वतंत्रता आंदोलन में दोनों संगठनों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस लगातार यह दावा करती रही है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, बीजेपी नेताओं की ओर से कांग्रेस के इन दावों और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की उसकी व्याख्या पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
धर्मशिला गुप्ता ने कहा कि आजादी के संघर्ष से जुड़े इतिहास को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखते हुए तथ्यों के आधार पर समझना चाहिए। उन्होंने खरगे के बयान को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता से इतिहास के तथ्यों की बेहतर समझ की उम्मीद की जाती है। स्वतंत्रता संग्राम में RSS और कांग्रेस की भूमिका को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस होती रही है। दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अलग-अलग दावे करते हैं और अपने-अपने ऐतिहासिक संदर्भ पेश करते हैं। खरगे के ताजा बयान के बाद यह बहस एक बार फिर राजनीतिक मंच पर चर्चा का विषय बन गई है। बीजेपी सांसद के बयान के बाद अब कांग्रेस की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है। दोनों दलों के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बयानबाजी का कारण बन सकता है।