Bihar Exit Poll 2025: फिर बनेगी NDA की सरकार

बड़ी खबर

Update: 2025-11-11 13:40 GMT
Patna. पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है। राज्य में 6 नवंबर को पहले चरण में 121 सीटों पर और 11 नवंबर को दूसरे चरण में 122 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ। दोनों चरणों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक दूसरे चरण में शाम 5 बजे तक 67.14 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। इस बार का विधानसभा चुनाव कई मायनों में खास रहा, क्योंकि यह पहली बार है जब भाजपा के नेतृत्व में एनडीए और लालू प्रसाद यादव के महागठबंधन के अलावा प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी मैदान में पूरी ताकत झोंकी।

दूसरे चरण में NDA का पलड़ा भारी
दैनिक भास्कर रिपोर्टर्स पोल के अनुसार, दूसरे चरण की 122 सीटों में NDA को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। एनडीए घटक दलों में भाजपा 53 सीटों, जेडीयू 44 सीटों, और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) 6 सीटों पर चुनाव लड़ी। वहीं एलजेपी (रामविलास) ने 15 उम्मीदवार उतारे। रिपोर्ट के मुताबिक, एनडीए को स्पष्ट बहुमत के संकेत मिल रहे हैं। दूसरी ओर महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल) को 73 से 91 सीटों पर ही बढ़त मिलती दिख रही है। जबकि जन सुराज पार्टी 3 सीटों पर कड़े मुकाबले में है और उसका खाता खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। AIMIM सिर्फ एक सीट पर सिमट सकती है।

महागठबंधन को नुकसान, कई दिग्गजों पर संकट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस चुनाव में महागठबंधन को बड़ा नुकसान होता दिख रहा है।
राजद के तेजप्रताप यादव की महुआ सीट पर कांटे की टक्कर है।
कांग्रेस की मैथिली ठाकुर अलीनगर में संघर्ष कर रही हैं।
रामकृपाल यादव (दानापुर) और विजय सिन्हा (लखीसराय) की सीटों पर भी जोरदार मुकाबला है।
सम्राट चौधरी की तारापुर सीट पर भी स्थिति उलझी हुई है।
महागठबंधन के डिप्टी सीएम कैंडिडेट मुकेश सहनी का खाता खुलना मुश्किल नजर आ रहा है।

एग्जिट पोल में NDA को स्पष्ट बहुमत
चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल्स में भी एनडीए की सरकार बनती नजर आ रही है।
पीपुल्स पल्स के सर्वे के मुताबिक, एनडीए को 133 से 159 सीटें मिल सकती हैं।
वहीं मैट्रिज एग्जिट पोल ने एनडीए को 147 से 167 सीटों तक का अनुमान दिया है।
इस आधार पर राज्य में एक बार फिर भाजपा-जेडीयू गठबंधन की सरकार बनने की संभावना मजबूत हो गई है।
वहीं महागठबंधन को 73-91 सीटें मिलने का अनुमान है।
जन सुराज पार्टी को 2 से 4 सीटों तक मिल सकती हैं, जबकि AIMIM एक सीट पर सिमटने की संभावना है।

प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ बनी नई ताकत
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने इस बार बिहार की राजनीति में तीसरा विकल्प बनने की शुरुआत कर दी है। भले ही पार्टी को सीमित सीटें मिलें, लेकिन कई क्षेत्रों में उसने महागठबंधन और एनडीए दोनों के समीकरणों को प्रभावित किया है। खासकर सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और सीवान में जन सुराज ने वोट बैंक में सेंध लगाई है।


RJD-कांग्रेस को झटका, वोट ट्रांसफर नहीं हुआ

विशेषज्ञों का कहना है कि महागठबंधन के भीतर वोट ट्रांसफर की कमी बड़ी वजह बन रही है। आरजेडी और कांग्रेस के गठबंधन को अपेक्षित लाभ नहीं मिला। यादव-मुस्लिम समीकरण वाले इलाकों में भी वोटों का ध्रुवीकरण देखने को मिला। कांग्रेस का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा, कई सीटों पर उसके उम्मीदवार तीसरे नंबर पर पहुंच गए।

AIMIM का असर सीमित
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को इस बार सिर्फ एक सीट पर बढ़त मिलने का अनुमान है। सीमांचल में पार्टी ने पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन मतदाताओं ने उसे व्यापक समर्थन नहीं दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, AIMIM का असर सिर्फ मुस्लिम बहुल इलाकों तक सीमित रहा और उसने महागठबंधन को नुकसान जरूर पहुंचाया, पर खुद को निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित नहीं कर पाई।

एग्जिट पोल का आधार और मेथडॉलॉजी
इस सर्वे में 400 से ज्यादा रिपोर्टर्स बिहार के सभी जिलों में ग्राउंड पर रहे। उनसे मिले इनपुट्स के आधार पर 5 सीनियर जर्नलिस्ट, 4 पॉलिटिकल एक्सपर्ट और 2 सेफोलॉजिस्ट्स की टीम ने चर्चा कर परिणाम तैयार किया। साथ ही राजनीतिक दलों के इंटरनल सर्वे और स्थानीय फीडबैक को भी शामिल किया गया। इससे जो रुझान सामने आए, उसमें एनडीए को क्लीन स्वीप जैसा प्रदर्शन करते हुए 147 से 167 सीटों तक मिलने का अनुमान है।

वोटिंग प्रतिशत और मतदाताओं का उत्साह
दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान मतदाताओं ने उत्साह दिखाया।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, शाम 5 बजे तक 67.14% मतदान दर्ज किया गया। कई इलाकों में महिलाएं बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचीं।
ग्रामीण इलाकों में मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं।
पहले चरण में 121 सीटों पर औसतन 64% वोटिंग हुई थी।

चुनाव परिणाम की उलटी गिनती शुरू
अब बिहार में राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया है। दोनों चरणों की वोटिंग खत्म होने के बाद अब सभी की नजरें गिनती की तारीख पर टिकी हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर एग्जिट पोल के नतीजे सच साबित हुए तो बिहार में एक बार फिर एनडीए की वापसी होगी और नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद बरकरार रह सकता है।
हालांकि बीजेपी के भीतर भी कुछ सीटों पर बेहतर प्रदर्शन के चलते पार्टी का दबदबा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीति विशेषज्ञ प्रो. अजय कुमार का कहना है कि "एनडीए की मजबूती ग्रामीण वोटरों और महिला मतदाताओं के भरोसे पर टिकी है। विकास, सुरक्षा और केंद्र सरकार की योजनाओं का असर मतदाताओं तक पहुंचा है।" वहीं सीनियर जर्नलिस्ट राजेश सिंह का कहना है कि "महागठबंधन की सबसे बड़ी कमजोरी उसका नेतृत्व संकट और अंतर्कलह रही। कांग्रेस और आरजेडी के बीच तालमेल की कमी ने नुकसान किया।"

नतीजों पर सभी की निगाहें
बिहार में 243 सीटों की विधानसभा के लिए बहुमत का आंकड़ा 122 सीटें है। एग्जिट पोल्स के रुझानों के मुताबिक, एनडीए इस आंकड़े को आराम से पार करता नजर आ रहा है। अब सभी की निगाहें वोटों की गिनती और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि बिहार की सत्ता पर कौन कब्जा करेगा — नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए या लालू परिवार के नेतृत्व वाला महागठबंधन।
Tags:    

Similar News