बिहार चुनाव 2025: सीमांचल में AIMIM ने महागठबंधन की उम्मीदों पर दी चोट
ओवैसी ने 7 सीट महागठबंधन की बिगाड़ी
Bihar. बिहार। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीमांचल क्षेत्र की 24 सीटों ने राजनीति का बड़ा संदेश दिया है। मुस्लिम आबादी के भारी होने के बावजूद महागठबंधन (RJD-कांग्रेस गठबंधन) अपने प्रदर्शन में पिछड़ गया और अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका। चुनाव नतीजों से यह साफ़ हुआ कि मुस्लिम वोटों का बंटना महागठबंधन के लिए नुकसानदायक साबित हुआ और इसका सीधे तौर पर फायदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को मिला। सीमांचल में चार मुख्य जिले—पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज—मुस्लिम आबादी के सबसे बड़े केंद्र माने जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र महागठबंधन का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन 2025 के चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इस क्षेत्र में मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई। मुस्लिम वोट पूरे एकजुट होकर महागठबंधन को नहीं मिले, जिससे एनडीए को निर्णायक लाभ मिला और उसने 24 में से 14 सीटें जीत लीं।
AIMIM ने मुस्लिम वोटों में सेंध लगाई
AIMIM ने सीमांचल में अपने मजबूत प्रदर्शन को दोहराते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें बहादुरगंज, कोचाधामन (किशनगंज), अमौर, बैसी (पूर्णिया) और जोकीहाट (अररिया) शामिल हैं। विशेष रूप से जोकीहाट सीट पर RJD चौथे स्थान पर रही, जो महागठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे साफ़ होता है कि AIMIM अब सीमांचल की राजनीति में निर्णायक खिलाड़ी बन गई है और उसका वोट बैंक महागठबंधन की संभावनाओं को प्रभावित करने में सक्षम है।
एनडीए ने हिंदू वोटों में बढ़त बनाई
दूसरी ओर एनडीए ने हिंदू वोटों को बड़े पैमाने पर अपने पक्ष में एकजुट किया। जातीय समीकरणों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए बीजेपी, जेडीयू और LJP (राम विलास) ने 14 सीटें अपने कब्जे में ले लीं। सीटों का विवरण इस प्रकार है:
बीजेपी: 7 सीटें
जेडीयू: 5 सीटें
एलजेपी (राम विलास): 2 सीटें
इस प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि सीमांचल जैसी चुनौतीपूर्ण जनसांख्यिकी वाले क्षेत्र में भी एनडीए ने सफल रणनीति अपनाई और मजबूत पकड़ बनाई।
महागठबंधन का कमजोर प्रदर्शन
महागठबंधन इस क्षेत्र में बड़ी उम्मीदें लेकर उतरा था, लेकिन उसे सिर्फ 5 सीटें मिलीं। इसमें कांग्रेस ने चार सीटें जीतीं और RJD को केवल एक सीट मिली। कांग्रेस का राज्यभर में स्ट्राइक रेट अपेक्षाकृत कमजोर रहा, लेकिन सीमांचल में उसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर दिखा। हालांकि, यह बढ़त महागठबंधन के लिए पर्याप्त नहीं थी। उच्च मुस्लिम आबादी वाले जिले—किशनगंज (67.89%), कटिहार (44.47%), अररिया (42.95%) और पूर्णिया (38.46%)—में भी महागठबंधन को अपेक्षित फायदा नहीं मिला। इसका मुख्य कारण मुस्लिम वोटों का AIMIM और महागठबंधन में बंटना माना जा रहा है।
वोट बंटाव का विश्लेषण
मुस्लिम वोट बंटाव ने एनडीए को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया। जबकि महागठबंधन को उम्मीद थी कि मुस्लिम वोट उनके पक्ष में पूरी तरह से जाएंगे, AIMIM ने अपनी पैठ बनाए रखी। परिणाम स्वरूप एनडीए को बहुल सीटों पर जीत हासिल हुई।
पार्टी 2020 सीटें 2025 सीटें
एनडीए 12 14
महागठबंधन 7 5
AIMIM 5 5
जाहिर है कि एनडीए ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया, AIMIM ने अपनी पकड़ बनाए रखी, लेकिन महागठबंधन, जो सीमांचल को अपना कोर क्षेत्र मानता था, वह यहां पिछड़ गया। सीमांचल का यह चुनावी परिणाम बिहार की राजनीतिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। एनडीए ने हिंदू वोटों में संगठन मजबूत किया और मुस्लिम वोटों के बंटने से लाभ उठाया। AIMIM की बढ़ती पकड़ ने महागठबंधन को चुनौती दी और सीमांचल की राजनीति में नई दिशा तय की। इस क्षेत्र में आगामी चुनावों में महागठबंधन को अपनी रणनीति फिर से तैयार करनी होगी, जबकि AIMIM और एनडीए अपनी पैठ और मजबूत करने की कोशिश करेंगे। सीमांचल की राजनीति अब बहुलवाद, जातीय समीकरण और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर निर्भर हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों में इन सीटों पर सघन राजनीतिक गतिविधियां और वोटरों की रणनीतिक भूमिका देखने को मिलेगी।