BIG BREAKING: LOC पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम, दो आतंकवादी ढेर

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Update: 2025-09-28 11:43 GMT
Srinagar. श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में रविवार को संयुक्त सुरक्षा बलों ने लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। यह कार्रवाई केरन सेक्टर में एलओसी के पास हुई, जहां संदिग्ध गतिविधि देखी गई थी। सूत्रों के अनुसार, इलाके में तुरंत एंटी-इनफिल्ट्रेशन ऑपरेशन शुरू किया गया। सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की पूरी कोशिश को विफल कर दिया। ऑपरेशन अभी भी जारी है और सेना पूरे क्षेत्र में
सतर्कता
बनाए हुए है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी रणनीति में हाल ही में बदलाव किए गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद, सुरक्षा बल अब सिर्फ बंदूकधारी आतंकवादियों तक सीमित नहीं रह रहे, बल्कि पूरे आतंकवादी नेटवर्क, उनके सहयोगियों और समर्थकों को निशाना बना रहे हैं। इसके तहत ड्रग तस्करी और हवाला रैकेट जैसी गतिविधियों पर भी कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि इनसे जुटाया गया पैसा आतंकवाद को बढ़ावा देने में इस्तेमाल होता है।
सुरक्षा बलों ने एलओसी और अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर 24/7 निगरानी बढ़ा दी है, ताकि सर्दियों में बर्फबारी से पहले कोई आतंकवादी भारतीय क्षेत्र में प्रवेश न कर सके। जम्मू-कश्मीर में 740 किलोमीटर लंबी एलओसी है, जिसकी सुरक्षा भारतीय सेना करती है। वहीं 240 किलोमीटर लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा बीएसएफ करती है। एलओसी कुपवाड़ा, बारामूला और बांदीपोरा जिलों तथा जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ और जम्मू जिलों के कुछ हिस्सों में फैली हुई है। सुरक्षा बलों ने बताया कि पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना की मदद से काम करने वाले आतंकवादी संगठन हथियार, गोला-बारूद, नकदी और ड्रग्स जैसे सामान सीमा पार भेजने के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं। भारतीय सुरक्षा बल, विशेषकर बीएसएफ, ने एंटी-ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है। इसके चलते अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार से भेजे जाने वाले ड्रोन के खतरे पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। यह कदम आतंकवाद के वित्तीय और तकनीकी संसाधनों को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा है।
सुरक्षा बलों का कहना है कि आतंकवाद को रोकने के लिए केवल हमलावर आतंकवादियों को मारना पर्याप्त नहीं है। पूरे नेटवर्क को भंग करना आवश्यक है, जिसमें उनके सहयोगी, समर्थक और सहानुभूतिपूर्ण तंत्र शामिल हैं। इस दृष्टिकोण के तहत ड्रग तस्कर और हवाला रैकेट भी निशाने पर हैं। जम्मू-कश्मीर में हाल के महीनों में एलओसी पर आतंकवादियों की घुसपैठ की कई कोशिशों को नाकाम किया गया है। सुरक्षा बलों की सतर्कता और तकनीकी उपकरणों के इस्तेमाल से आतंकवादी प्रवेश प्रयास विफल रहे। कुपवाड़ा और बारामूला में पिछले कुछ महीनों में ऐसे कई ऑपरेशन किए गए हैं, जिनमें आतंकवादियों और उनके सहयोगियों को ढेर या गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान क्षेत्रीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी तरह की झड़प या हमला नागरिकों को प्रभावित न करे, इसके लिए सेना और बीएसएफ ने पूरी तैयारी कर रखी है।
यह कार्रवाई आतंकवाद विरोधी रणनीति में बदलाव का उदाहरण है। पहले सुरक्षा बल केवल सक्रिय आतंकवादियों पर ध्यान केंद्रित करते थे, लेकिन अब उनकी कार्रवाई व्यापक है। यह रणनीति आतंकवाद के पूरे सिस्टम को समाप्त करने की दिशा में है। सुरक्षा बलों की सतर्कता और एलओसी पर बढ़ी निगरानी से न केवल घुसपैठ की कोशिशें नाकाम हो रही हैं, बल्कि आतंकवादियों के वित्तीय और सामरिक संसाधनों पर भी नियंत्रण पाया जा रहा है। ऑपरेशन के दौरान इकट्ठा की गई जानकारी से आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बीच यह घटना एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखी जा रही है। सुरक्षा बलों ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की खतरे की स्थिति से निपटने के लिए हमेशा तैयार हैं। इस ऑपरेशन में दो आतंकवादियों की मौत के साथ ही यह संदेश गया है कि सुरक्षा बल किसी भी घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं करेंगे और एलओसी पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।
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