BIG BREAKING: अजित डोभाल की पुतिन से मुलाकात: भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को मजबूती देने की कवायद

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Update: 2025-08-07 17:27 GMT
New Delhi/Moscow. नई दिल्ली/मॉस्को। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने 7 अगस्त 2025 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मॉस्को में मुलाकात की। यह उच्चस्तरीय भेंट भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। डोभाल की इस यात्रा को आने वाले महीनों में पुतिन की संभावित भारत यात्रा की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।


पुतिन से मुलाकात में क्या हुआ?
बैठक के दौरान डोभाल और पुतिन के बीच रक्षा सौदों, ऊर्जा परियोजनाओं और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को 21वीं सदी के नए खतरों और अवसरों के अनुरूप ढालने पर सहमति बनी है। डोभाल ने भारतीय नेतृत्व की ओर से राष्ट्रपति पुतिन को वर्षांत में भारत यात्रा के लिए आमंत्रण भी सौंपा है, जिसे पुतिन ने सकारात्मक रूप से लिया।

रूसी सुरक्षा परिषद सचिव सर्गेई शोइगू से भी मुलाकात
इससे पहले डोभाल ने रूसी सुरक्षा परिषद के नवनियुक्त सचिव सर्गेई शोइगू से मुलाकात की। शोइगू ने भारत-रूस संबंधों को “मजबूत, समय की कसौटी पर खरे और विश्वास आधारित” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अब वक्त आ गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक नई उच्चस्तरीय वार्ता को जल्द से जल्द आयोजित किया जाए।

साझा उद्देश्य और रणनीतिक समझ
डोभाल और शोइगू के बीच हुई चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दोनों देश न केवल ऐतिहासिक रूप से बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भी एक-दूसरे के रणनीतिक सहयोगी बने रहें। बैठक में खासतौर पर इन क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी:
रक्षा और सुरक्षा: नई रक्षा तकनीकों के ट्रांसफर और संयुक्त उत्पादन पर ध्यान।
ऊर्जा सहयोग: रूस की ऊर्जा कंपनियों द्वारा भारत में निवेश और LNG आपूर्ति की निरंतरता।
आतंकवाद विरोधी कार्रवाई: वैश्विक आतंकवाद से निपटने में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता।
तकनीकी और साइबर सुरक्षा: भविष्य की साइबर चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास।

वैश्विक चुनौतियों के समाधान में साझेदारी
डोभाल और रूसी नेतृत्व के बीच हुई वार्ता में इस बात पर भी सहमति बनी कि भारत और रूस को आधुनिक समय की वैश्विक चुनौतियों जैसे आतंकवाद, साइबर हमले, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अफगानिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मिलकर कार्य करना चाहिए।
भारत-रूस संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं और शीत युद्ध काल से ही दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक सहयोगी रहे हैं। हालांकि हाल के वर्षों में रूस-चीन और भारत-अमेरिका के समीकरणों ने इस रिश्ते को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, फिर भी दोनों देश लगातार संवाद बनाए हुए हैं। 2024 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की आखिरी मुलाकात उज़्बेकिस्तान में हुई थी, जहां ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों पर दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए थे।
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