AI वाले विज्ञापन से सावधान! कहीं आप न बन जाएं शिकार
दिखने वाला चेहरा 'नकली'
नई दिल्ली: आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जितनी हमारी जिंदगी आसान बना रहा है, उतनी ही तेजी से यह ठगों और धोखेबाजों का सबसे नया और खतरनाक हथियार भी बनता जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर यूट्यूब तक, हर जगह 'AI जनित विज्ञापनों' (AI-generated ads) की बाढ़ आ गई है। ये विज्ञापन इतने असली दिखते हैं कि एक आम इंसान के लिए सच और झूठ का फर्क कर पाना नामुमकिन सा हो गया है। अगर आप भी इंटरनेट पर दिखने वाले हर लुभावने विज्ञापन पर भरोसा कर लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है। बड़े-बड़े नेताओं, फिल्मी सितारों और क्रिकेटरों के चेहरों और आवाजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑफर 'आज के लिए है बस' या 'आज आखिरी दिन है' इस तरह के विज्ञापन दिख रहें हैं। AI विज्ञापन में पीएम मोदी, राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, प्रियंका गांधी और सचिन तेंदुलकर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कैसे काम कर रहा है यह नया खेल?
धोखेबाज AI तकनीक, खासकर डीपफेक (Deepfake) और वॉयस क्लोनिंग (Voice Cloning) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस खेल को समझने के लिए इन मुख्य तरीकों को देखें:
सेलिब्रिटी का झूठा भरोसा
नेताओं, बड़े फिल्मी सितारों और क्रिकेटरों के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल कर फर्जी वीडियो बनाए जाते हैं। इसमें वे किसी खास ऐप में पैसा लगाने या किसी स्कीम से रातों-रात अमीर बनने का दावा करते नजर आते हैं।
न्यूज एंकर्स का इस्तेमाल
जाने-माने टीवी न्यूज चैनलों के एंकर्स के डीपफेक वीडियो बनाकर ऐसा दिखाया जाता है जैसे कोई बड़ी ब्रेकिंग न्यूज चल रही हो, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते हैं।
अविश्वसनीय डिस्काउंट और ऑफर्स
ब्रांडेड कपड़े, महंगे स्मार्टफोन या गैजेट्स को बेहद कम दाम में बेचने का दावा करने वाले विज्ञापन दिखाए जाते हैं। सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए (खासकर इंस्टाग्राम) आप जिस चेहरे को देखकर कोई ऑफर पर दिलचस्पी या सामान खरीदने की सोच रहे हैं, मुमकिन है कि वह कोई इंसान ही न हो। हम ये बात इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि एक नई और चौंकाने वाली खबर के मुताबिक, कई कंपनियां अपने ऑफर और प्रोडक्ट्स के प्रचार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रही हैं। ये तस्वीरें और वीडियो इतने असली लगते हैं कि आम ग्राहकों को लगता है कि कोई सच्चा उपभोक्ता अपना असली अनुभव साझा कर रहा है।
सच छिपाने की साजिश
इस खेल में पारदर्शिता को पूरी तरह खत्म करने के लिए कंपनियां एक नया तरीका अपना रही हैं।
भ्रम का खतरा- असली-नकली की पहचान मुश्किल
बढ़ते ऐसे मामले को देखते हुए विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विज्ञापनों में एआई के इस बढ़ते इस्तेमाल से ग्राहकों का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। इसके कुछ बड़े उदाहरण भी सामने आए हैं।