Ranchi. रांची। झारखंड शराब घोटाले के आरोपी और निलंबित सीनियर IAS विनय चौबे को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने गुरुवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। याचिका की सुनवाई न्यायाधीश जस्टिस संजय द्विवेदी की अदालत में हुई। विनय चौबे की ओर से अधिवक्ता देवेश आजमानी ने पैरवी की थी। जमानत याचिका में चौबे ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर और गिरफ्तारी को चुनौती दी थी और सभी दंडात्मक कार्रवाई रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी और जांच पूरी तरह वैध है, इसलिए जमानत का कोई आधार नहीं है। झारखंड एसीबी ने 20 मई 2025 को चौबे को लगभग छह घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक एफआईआर में चौबे समेत कुल 13 लोगों को नामजद किया गया है।
शराब घोटाले की पृष्ठभूमि
झारखंड में शराब घोटाले की शुरुआत 2022 में हुई, जब छत्तीसगढ़ की तर्ज पर नई एक्साइज पॉलिसी लागू की गई। पॉलिसी को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ करार किया गया था। जांच में पता चला कि पॉलिसी लागू करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं। आरोप है कि एक विशेष सिंडिकेट के लिए टेंडर की शर्तें मनमाने ढंग से बदली गईं, जिससे उन्हें शराब के ठेके हासिल करने में मदद मिली। सिंडिकेट ने छत्तीसगढ़ की कंसल्टेंट कंपनी के अधिकारियों के सहयोग से मिलकर झारखंड में शराब की सप्लाई और होलोग्राम सिस्टम के ठेके हासिल किए।
वित्तीय नुकसान और गिरफ्तारी
टेंडर लेने वाली कंपनियों द्वारा जमा की गई बैंक गारंटियां फर्जी पाई गईं, जिससे राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। झारखंड राज्य बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की आंतरिक अंकेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, सात एजेंसियों ने कुल 129.55 करोड़ रुपये की चपत लगाई। अब तक इस मामले में झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। विनय चौबे ने झारखंड में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वे पहले झारखंड के उत्पाद विभाग के सचिव, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सचिव और अन्य प्रमुख पदों पर रहे हैं। चौबे की गिरफ्तारी और मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी और पुलिस लगातार जांच कर रही है और अन्य दोषियों तक पहुँचने की कोशिश जारी है।
न्यायालय की प्रतिक्रिया
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि शराब घोटाले में राज्य के आर्थिक हित को भारी नुकसान हुआ है और जमानत देने से साक्ष्यों और जांच में बाधा उत्पन्न हो सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत अनुचित और असंगत होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि चौबे की गिरफ्तारी और जांच संपूर्ण वैध प्रक्रिया के तहत हुई है और इसके आधार पर किसी भी दंडात्मक कार्रवाई को रद्द नहीं किया जा सकता। विनय चौबे अब जेल में रहेंगे और एसीबी द्वारा की जा रही जांच में संपूर्ण सहयोग करना होगा। अदालत ने ट्रायल प्रक्रिया को प्राथमिकता से निपटाने और दोषियों तक जल्द से जल्द पहुँच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। झारखंड हाईकोर्ट की इस खारिजी से स्पष्ट हो गया है कि शराब घोटाले में शामिल सभी आरोपी जांच और कानूनी प्रक्रिया में पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।
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