नई दिल्ली: अहमदाबाद में दुर्घटनास्थल से एयर इंडिया विमान का एक ब्लैक बॉक्स बरामद किया गया है. इसके विश्लेषण से ही हादसे की वजहों के बारे में सुराग मिलेंगे. ब्लैक बॉक्स एक छोटा उपकरण होता है जो उड़ान के दौरान विमान की गतिविधियों के बारे में जानकारी रिकॉर्ड करता है. यह विमानन दुर्घटनाओं की जांच में मदद करता है. विमान हादसे के बारे में कॉमर्शियल पायलट अरिंदम दत्ता कहते हैं कि हादसे की वजह के बारे में सटीक जानकारी विमान के पिछले हिस्से में मौजूद ब्लैक बॉक्स के बरामद होने और उसकी जांच के बाद ही पता चल पाएगी.
कुछ रिपोर्टों के विपरीत, प्रसारित किया जा रहा वीडियो रिकॉर्डर DFDR (डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) नहीं है. ब्लैक बॉक्स छत पर पाया गया. AAIB ने तुरंत पूरी ताकत से काम शुरू कर दिया. राज्य सरकार के 40 से अधिक कर्मचारियों ने साइट पर MoCA टीमों को बढ़ाने के प्रयासों में भाग लिया. DFDR को छत से बरामद कर लिया गया है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दी जानकारी.
मौत को दी मात
विश्वास और भूमि... ये वो दो लोग हैं, जिनकी अलग-अलग कारणों से अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश से जान बच गई. इन दोनों की ही कहानी दिलचस्प है. दरअसल, विश्वास एअर इंडिया की फ्लाइट के इकलौते यात्री रहे जो यात्रा करने को बैठ गए लेकिन हादसे में बच गए. विश्वास को किसी चमत्कार ने बचाया तो भूमि को ट्रैफिक जाम ने. कारण, भूमि ट्रैफिक जाम लगने की वजह से फ्लाइट बोर्ड ही नहीं कर पाईं.
विमान हादसे में इकलौते बचे यात्री विश्वास कुमार से आज शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आकर हालचाल पूछा. इसके बाद अस्पताल के बिस्तर पर लेटे विश्वास कुमार ने मीडिया को अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि प्लेन जैसे ही रनवे पर स्पीड पकड़ने लगा, तभी कुछ अजीब-सा लगा. अचानक 5-10 सेकंड के लिए सब जैसे रुक गया था. सन्नाटा, फिर एकदम से ग्रीन और व्हाइट लाइट्स ऑन हो गईं. लगा कि जैसे टेकऑफ के लिए पायलट ने पूरा जोर लगा दिया हो. बस फिर क्या था, प्लेन रफ्तार से सीधा हॉस्टल की बिल्डिंग में जा घुसा.
विश्वास ने बताया कि मेरी सीट प्लेन के जिस हिस्से में थी, वो बिल्डिंग के निचले हिस्से से टकराया होगा. ऊपर के हिस्से में आग लग गई थी, कई लोग वहीं फंसे रह गए. शायद मैं सीट सहित नीचे गिर गया था. मैं जैसे-तैसे निकल पाया. दरवाजा टूट गया था, और सामने कुछ खाली जगह दिखी, तो निकलने की कोशिश की. दूसरी साइड पर दीवार थी, वहां से शायद कोई नहीं निकल सका. मेरी आंखों के सामने ही दो एयर होस्टेस, एक अंकल-आंटी और सबकुछ जल रहा था. इस हादसे में मेरा बायां हाथ बुरी तरह जल गया, लेकिन जान बच गई. मैं जैसे ही बाहर आया, आग फैल रही थी. कुछ सेकंड और देर होती तो शायद...
गुजरात के भरूच की रहने वाली भूमि चौहान की कहानी इससे थोड़ी अलग है. उनकी जान ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण बच गई. दरअसल, भूमि दो साल बाद छुट्टियां मनाने के लिए भारत आई थीं. वह लंदन में अपने पति के साथ रहती हैं. उन्हें गुरुवार को दुर्घटनाग्रस्त हुई एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 से वापस लंदन जाना था, लेकिन ट्रैफिक जाम की वजह से वह समय से एयरपोर्ट पर नहीं पहुंच पाईं, जिसके चलते उनकी जान बच गई. अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचने में 10 मिनट की देरी भूमि चौहान के लिए वरदान बन गई.