पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार के मुसलमानों से राजनीति में अपने समुदाय के प्रतिनिधित्व की चिंता स्वयं करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को किसी राजनीतिक दल का पिछलग्गू बनने से बचना चाहिए और अपने अधिकारों तथा उचित राजनीतिक भागीदारी के लिए संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए। प्रशांत किशोर ने रविवार को राजधानी पटना के मुस्लिम बहुल सब्जीबाग इलाके में आयोजित अल्पसंख्यक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।
सब्जीबाग बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हाल में हुए उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। सम्मेलन के दौरान उन्होंने उपचुनाव में मिले समर्थन के लिए स्थानीय मतदाताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब अल्पसंख्यक समुदाय के लिए ऐसी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाना चाहिए, जिसमें उन्हें लोकतांत्रिक राजनीति में उनकी आबादी और भागीदारी के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिल सके।
प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं इस अवसर पर हाल के उपचुनाव में आपके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करना चाहता हूं। अब हमें अल्पसंख्यकों के लिए एक उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए, जिन्हें लोकतांत्रिक राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए।” उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर जागरूक रहने और केवल किसी एक दल पर निर्भर न रहने की अपील की।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने कहा कि किसी भी समुदाय का विकास केवल चुनावों में मतदान करने से संभव नहीं है। इसके लिए राजनीतिक दलों के भीतर भागीदारी, उम्मीदवारों के चयन और नीतिगत फैसलों में प्रतिनिधित्व भी आवश्यक है। उन्होंने मुस्लिम समाज से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने की अपील की। किशोर के अनुसार, किसी पार्टी का बिना सवाल किए समर्थन करने के बजाय उसके काम, नीतियों और उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
उनका यह बयान बिहार की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच सामने आया है। राज्य में मुस्लिम समुदाय को लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के पारंपरिक समर्थक वर्ग के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि हालिया चुनावी घटनाक्रम और बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम के बाद इस मतदाता वर्ग के राजनीतिक रुख को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रशांत किशोर की जीत को जन सुराज की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही थी। उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद जन सुराज ने इसे अपनी नीतियों और वैकल्पिक राजनीति की स्वीकार्यता के रूप में पेश किया। पार्टी का दावा है कि उसे अलग-अलग सामाजिक वर्गों के साथ मुस्लिम मतदाताओं का भी समर्थन मिला। सब्जीबाग सम्मेलन को इसी समर्थन को मजबूत करने और समुदाय के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशांत किशोर ने सम्मेलन में विरोधी दलों की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन लेने वाले दलों को चुनाव में समुदाय को पर्याप्त टिकट और सत्ता में उचित हिस्सेदारी देने पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार चयन और टिकट वितरण के तरीके को लेकर आरोप लगाए। हालांकि उनके इन आरोपों पर संबंधित दल की प्रतिक्रिया तत्काल सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उन्हें प्रशांत किशोर के राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उन्होंने भाजपा की राजनीति पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विकास और जनहित से जुड़े बुनियादी मुद्दों के बजाय प्रतीकात्मक विषयों और स्थानों के नाम बदलने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि राज्य की राजनीति में शिक्षा, रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार जैसे विषयों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने लोगों से जाति और धर्म से ऊपर उठकर अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के आधार पर राजनीतिक निर्णय लेने की अपील की।
प्रशांत किशोर ने जनता दल यूनाइटेड और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की राजनीति में स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हुई है। किशोर लगातार यह दावा करते रहे हैं कि जन सुराज बिहार में भाजपा, राजद और जदयू के मुकाबले एक नया राजनीतिक विकल्प तैयार करने का प्रयास कर रही है। सब्जीबाग के सम्मेलन में दिया गया उनका वक्तव्य भी पार्टी की इसी रणनीति से जुड़ा दिखाई देता है।
जन सुराज ने अपनी स्थापना के बाद से शिक्षा, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया है। पार्टी ने गांवों और प्रखंडों तक संगठन खड़ा करने की कोशिश की है। हालांकि विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद पार्टी की चुनावी क्षमता पर सवाल उठे थे। बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत ने पार्टी कार्यकर्ताओं को नया राजनीतिक आधार और उत्साह दिया है।
अल्पसंख्यक सम्मेलन में किशोर का भाषण केवल धन्यवाद तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने मुस्लिम समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर सक्रिय होने का संदेश दिया। उनका कहना था कि समुदाय को यह स्वयं तय करना होगा कि उसकी आवाज कौन प्रभावी तरीके से उठाता है और उसके हितों की रक्षा कौन करता है। प्रशांत किशोर के इस बयान और सब्जीबाग में आयोजित सम्मेलन की पुष्टि हुई है।
किशोर के इस आह्वान से आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जन सुराज इस संदेश को अपनी संगठनात्मक और चुनावी रणनीति में किस तरह लागू करती है तथा मुस्लिम मतदाता पार्टी की इस राजनीतिक अपील को किस रूप में लेते हैं।