अभिजीत दीपके को टाइफाइड या आंदोलन से दूरी!
सुशांत सिन्हा बोले- एक बीमार, पूरी कॉकरोच पार्टी गायब क्यों?
New Delhi. नई दिल्ली। झारखंड में छात्रों के आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की गैरमौजूदगी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उन्हें टाइफाइड हो गया है और डॉक्टरों ने यात्रा करने से मना किया है, इसलिए वे आंदोलन में शामिल नहीं हो सके। हालांकि, उनके इस बयान के बाद वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा की टिप्पणी ने पूरे मामले को नई बहस में बदल दिया है। अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि वह आंदोलन का समर्थन करते हैं, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण मौके पर नहीं पहुंच सकते। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उन्हें आराम करने की आवश्यकता है और यात्रा करने से उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि यदि अभिजीत दीपके बीमार हैं तो क्या पूरी पार्टी भी बीमार हो गई है?
उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन वास्तव में पार्टी के लिए इतना महत्वपूर्ण है तो संगठन का कोई अन्य वरिष्ठ नेता या पदाधिकारी प्रदर्शन स्थल पर क्यों दिखाई नहीं दिया। सुशांत सिन्हा की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने इसे नेतृत्व और संगठन की सक्रियता से जोड़ते हुए सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि किसी व्यक्ति के बीमार होने पर उसकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है। वहीं कुछ समर्थकों ने अभिजीत दीपके का बचाव करते हुए कहा कि स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति की प्राथमिकता होनी चाहिए और बीमारी के दौरान यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि किसी भी राजनीतिक संगठन की ताकत उसके सामूहिक नेतृत्व में होती है।
यदि शीर्ष नेता किसी कारणवश मौजूद नहीं हो सकता, तो अन्य नेताओं को आगे आकर आंदोलन का नेतृत्व करना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल अभिजीत दीपके की ओर से बीमारी को लेकर जो जानकारी दी गई है, उसके संबंध में कोई स्वतंत्र चिकित्सीय पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। वहीं, पार्टी की ओर से भी इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। झारखंड में छात्रों का आंदोलन अपने मुद्दों को लेकर जारी है और इस बीच नेताओं की भूमिका तथा राजनीतिक दलों की सक्रियता पर भी चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर अब बहस केवल बीमारी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह नेतृत्व, संगठन की जिम्मेदारी और आंदोलन में भागीदारी जैसे व्यापक सवालों तक पहुंच चुकी है।