कुल्लू। विश्व के सबसे बड़े देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा पर्व में अठारह करडू की सौह ढालपुर मैदान पहुंचे सभी देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी के अस्थायी कैंप में जाकर हाजरी भरेंगे। यही नहीं, सभी देवी-देवताओं का भगवान रघुनाथ जी के रजिस्टर में बाकायदा एंट्री होने के बाद अठारह करोड़ देवी-देवताओं का देव महामिलन होगा। इस देव महामिलन को मुहल्ला कहते हैं।
इसके पश्चात देवी-देवताओं के दशहरा पर्व में सोमवार को रघुनाथ के दरबार में शक्ति का आह्वान होगा। दशहरा पर्व में इस शक्ति आह्वान को विधिवत रूप से किया जाएगा। मुहल्ला पर्व के लिए सभी देवी-देवताओं ने तैयारियां कर ली हैं। मुहल्ला पर्व में ही देवी-देवता भगवान रघुनाथ जी के रथ पर हाजिरी भरेंगे और रघुनाथ के पुजारी रथ पर बैठकर बाकायदा देवताओं के नाम रजिस्टर में दर्ज करेंगे, लेकिन सबसे पहले हिडिंबा देवी का नाम दर्ज होता है।
कुल्लू दशहरा पर्व अनूठी परंपरा का संगम है। शेष विश्व में दशहरा पर्व समाप्त होता है तथा कुल्लू में शुरू होता है। इसके पीछे धारणा यह है कि रावण पूर्णिमा के दिन मारा गया था। इसलिए कुल्लू का दशहरा पर्व पूर्णिमा से सात दिन पहले शुरू होता है तथा सातवें दिन लंका दहन में रावण को परंपरा अनुसार भेदा जाता है। बहरहाल छठे दिन कुल्लू के समस्त देवी-देवता रावण का सफाया करने के लिए मुहल्ला में एकत्र होंगे।