नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट बैठक में दी गई सलाह के बाद केंद्रीय मंत्रियों की इंस्टाग्राम सक्रियता बढ़ी है। 29 में से 28 मंत्री यानी 97 प्रतिशत मंत्री पहले के मुकाबले ज्यादा एक्टिव हुए और एक महीने में 1,179 पोस्ट किए गए। सरकार अब ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ कार्यक्रम के जरिए भी युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद की तैयारी कर रही है।
पीएम मोदी की सलाह के बाद मंत्रियों की बढ़ी सक्रियता
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पर मंत्रियों को ज्यादा सक्रिय रहने की सलाह के बाद सरकार के मंत्रियों ने इंस्टाग्राम पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। 24 जुलाई 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी ने मंत्रियों से इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहने, रील्स बनाने और खासतौर पर युवाओं के साथ संवाद बढ़ाने की बात कही थी।
इसके बाद 24 अगस्त तक 29 केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों में से 28 की इंस्टाग्राम गतिविधियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। यानी करीब 97 प्रतिशत मंत्री पहले की तुलना में सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय हुए। जदयू के राजीव रंजन सिंह को छोड़कर बाकी मंत्रियों की गतिविधियां बढ़ने की बात सामने आई है। मंत्रियों की ओर से पोस्ट किए जाने वाले कंटेंट में नीतियों, सरकारी योजनाओं, महत्वपूर्ण मुद्दों और रोजमर्रा की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी को प्रमुखता दी जा रही है।
एक महीने में 1,179 पोस्ट, रील्स पर खास जोर
प्रधानमंत्री की सलाह के बाद मंत्रियों ने रील्स के जरिए युवाओं तक पहुंचने पर विशेष ध्यान दिया है। पिछले एक महीने में मंत्रियों की ओर से कुल 1,179 पोस्ट किए गए। यह संख्या पहले की तुलना में करीब 48 प्रतिशत अधिक बताई गई है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी नीतियों और महत्वपूर्ण विषयों को रील्स के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया है। सोशल मीडिया को सरकार की योजनाओं और फैसलों को सरल तरीके से समझाने के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार की रणनीति में खास तौर पर युवा वर्ग तक सीधे पहुंच बनाने पर जोर दिखाई दे रहा है। इसके लिए सोशल मीडिया के साथ-साथ मंत्रियों के विश्वविद्यालय दौरों की योजना भी तैयार की जा रही है।
पीएम मोदी खुद भी सोशल मीडिया पर रहे सक्रिय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते रहे हैं। NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर कई वीडियो जारी किए थे। इन वीडियो के जरिए पीएम मोदी ने जेनरेशन-जेड यानी Gen-Z से सीधे संवाद करने की कोशिश की थी। उन्होंने पेपर लीक जैसे मुद्दे पर छात्रों को संबोधित किया था। एक वीडियो में प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वाले कुछ छात्रों को माफ करने की बात भी कही गई थी।
इसी तरह अब केंद्रीय मंत्रियों को भी सोशल मीडिया के जरिए युवा वर्ग तक अपनी बात पहुंचाने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए अधिक सक्रिय रहने की दिशा में काम करने को कहा गया है।
‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ के जरिए छात्रों से संवाद
युवाओं से सीधे जुड़ने के लिए केंद्र सरकार ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। इस योजना के तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री किसी एक विश्वविद्यालय का दौरा कर सकता है और वहां छात्रों से बातचीत कर उनकी चिंताओं और विचारों को समझ सकता है। 19 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक के दौरान इस कार्यक्रम पर चर्चा हुई थी। प्रस्तावित योजना के तहत मंत्री विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से अलग-अलग विषयों पर बातचीत करेंगे।
इस पहल का उद्देश्य सरकार और नई पीढ़ी के बीच सीधा संवाद स्थापित करना बताया जा रहा है। PTI के सूत्रों के अनुसार, इसके जरिए खासतौर पर Gen-Z तक सीधे पहुंच बनाने और उनकी राय समझने की कोशिश की जाएगी।
दो केंद्रीय मंत्रियों को दी गई समन्वय की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।
दोनों मंत्री विश्वविद्यालयों और वहां जाने वाले केंद्रीय मंत्रियों के बीच तालमेल बनाने का काम देखेंगे। हालांकि, मंत्रियों के विश्वविद्यालय दौरों का विस्तृत कार्यक्रम अभी सामने नहीं आया है। कैबिनेट बैठक में सोशल मीडिया पोस्ट की पहुंच को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्रियों को विशेष रूप से इस बात पर ध्यान देने के लिए कहा गया कि सरकारी नीतियों और संदेशों की जानकारी ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक कैसे पहुंचाई जाए।
इस पूरी रणनीति से साफ है कि केंद्र सरकार सोशल मीडिया को केवल जानकारी साझा करने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं के साथ सीधे संवाद के एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है। इंस्टाग्राम पर मंत्रियों की बढ़ती सक्रियता और विश्वविद्यालयों में सीधे संवाद की प्रस्तावित योजना इसी दिशा में उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है।