78 फीसदी स्कूलों में चारदीवारी ही नहीं

Update: 2026-06-20 11:27 GMT
Hospice. धर्मशाला। कांगड़ा जिले में सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत संचालित विद्यालयों के सामाजिक अंकेक्षण में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में आधारभूत सुविधाओं, छात्र सुरक्षा, समावेशी शिक्षा, प्रशासनिक निगरानी और शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के क्रियान्वयन से जुड़ी कई कमियों की ओर संकेत किया गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन व्यवस्थागत समस्याओं के समाधान के बिना गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा का लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा। धर्मशाला में आयोजित जनसुनवाई में सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। इस दौरान 2,000 से अधिक अभिभावकों, शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) सदस्यों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा भी उपस्थित रहे। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की टीम ने डॉ. रणधीर रांटा के नेतृत्व में जिले के 2,364 विद्यालयों में से 519 विद्यालयों का मूल्यांकन किया, जो कुल विद्यालयों का लगभग
20 प्रतिशत है।


रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डॉ. रांटा ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था का प्रदर्शन आरटीई के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल 44 प्रतिशत विद्यालयों में पर्याप्त कक्षाओं तथा शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए आवश्यक कमरों का अभाव पाया गया, जबकि 27 प्रतिशत विद्यालयों में पर्याप्त फर्नीचर उपलब्ध नहीं है। छात्र सुरक्षा से जुड़े हालात भी चिंताजनक पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार 78 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में चारदीवारी या सुरक्षा बाड़ नहीं है, जबकि करीब 65 प्रतिशत विद्यालय मोटर योग्य सडक़ से नहीं जुड़े हैं। इससे विद्यार्थियों, विशेषकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। लगभग नौ प्रतिशत विद्यालयों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय तथा पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं है। सामाजिक अंकेक्षण टीम के सदस्य हिमांशु ने बताया कि 40 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में किशोरियों को सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जाते। रिपोर्ट में विद्यालय सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी भी सामने आई है। करीब एक-तिहाई विद्यालयों में अनिवार्य स्कूल सुरक्षा समितियां गठित नहीं की गई हैं ।
Tags:    

Similar News