Delhi दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को हुए पीजी बिल्डिंग हादसे को लेकर दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक बिल्डिंग गिरने के बाद मलबे से कुल 12 लोगों को निकाला गया था। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जबकि पांच लोग घायल हुए थे। मामले की प्रारंभिक जांच में इमारत में अनधिकृत निर्माण और बदलाव किए जाने की बात सामने आई है।
दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि शुरुआती जांच में पता चला है कि बिल्डिंग में किए गए कथित अनधिकृत निर्माण और संरचनात्मक बदलावों के कारण इमारत पर अतिरिक्त भार बढ़ गया था। हालांकि बिल्डिंग गिरने की सटीक वजह का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों से संरचनात्मक जांच कराई जा रही है। विशेषज्ञ रिपोर्ट के आधार पर हादसे के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें संपत्ति के मालिक, निर्माण से जुड़ा ठेकेदार और पीजी का संचालन करने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस हादसे से जुड़े दस्तावेजों और निर्माण संबंधी गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
6 सितंबर को सत्य निकेतन स्थित पीजी बिल्डिंग के अचानक गिरने के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। सूचना मिलने के बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। कुल 12 लोगों को मलबे से निकाला गया, लेकिन इनमें से सात लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। पांच घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में किस स्तर पर बदलाव किए गए थे और क्या निर्माण के दौरान निर्धारित नियमों एवं सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। इसके साथ ही हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी जारी है। विशेषज्ञों की संरचनात्मक जांच पूरी होने के बाद बिल्डिंग गिरने की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है। पुलिस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और निर्माण से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
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