Shimla. शिमला। राज्य में बिना एफसीए मंजूरी के बनी सडक़ों को मान्यता के लिए फॉरेस्ट राइट एक्ट में स्वीकृतियों के लिए औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश जारी हुए हैं। लोक निर्माण विभाग को मंजूरी के लिए आवश्यक दस्तावेजों समेत अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने को कहा गया है। इसके बाद संबंधित अधिकारी एफआरए का केस तैयार कर वन विभाग को भेजेंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य में बिना मंजूरी के बनी 2183 सडक़ों को मान्यता देने के लिए राज्य सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए थे। साथ ही एक अधिसूचना भी इस संबंध में जारी की थी। उधर, राज्य सरकार के निर्देशों के बाद 2183 सडक़ों की जांच करने को कहा गया था।
छानबीन के बाद प्रदेश की 612 सडक़ों को एफआरए के मापदंडों के तहत मंजूरी देने के योग्य पाया गया। लिहाजा अब इस पर आगामी कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग को इन मामलों को वन विभाग के संबंधित अधिकारियों के समक्ष भेजने के निर्देश दिए गए है। अहम है कि एफआरए के तहत मंजूरी के लिए जिस पंचायत में सडक़ बनी है, उसकी ग्राम सभा का प्रस्ताव आवश्यक होता है, जबकि प्रशासनिक मंजूरी के साथ-साथ अलाइनमेंट के अलावा ज्वाइंट इंस्पेक्शन की रिपोर्ट भी अहम रहती है। तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही विभाग एफआरए में मंजूरी के वन विभाग को मामला भेजेगा। पता चला है कि प्रदेश में 612 सडक़ों में से 117 ऐसी भी हैं, जिनको लेकर मामले एफसीए के तहत लंबित पड़े हुए हंै। लिहाजा अब पीडब्ल्यूडी को एफसीए के केस वापस लेना होगा और एफआरए के प्रस्ताव तैयार कर वन विभाग को सौंपने होंगे।