Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन में कई क्षेत्रों में जनजीवन अभी तक सामान्य नहीं हो पाया है। 30 जून से 26 जुलाई के बीच प्रदेश में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 14 लोगों की जान भू-स्खलन की घटनाओं में गई, जबकि एक व्यक्ति की मौत फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से हुई। राहत की बात यह है कि इस अवधि में क्लाउडबस्र्ट से किसी की मौत दर्ज नहीं हुई है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रविवार शाम छह बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की मार अब भी जारी है। प्रदेश में 135 सडक़ें बंद, 44 ट्रांसफार्मर और 38 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार मानसून के दौरान लाहुल-स्पीति में भू-स्खलन से 13 लोगों की मौत हुई है, जबकि चंबा में एक व्यक्ति की जान भूस्खलन में गई।
कांगड़ा में फ्लैश फ्लड की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई। इस तरह मानसून से अब तक कुल 15 लोगों की जान जा चुकी है। बारिश के चलते सबसे ज्यादा असर कुल्लू जिला में है, जहां 54 सडक़ें बंद हैं। इसके बाद मंडी में 43, शिमला में 15, चंबा में आठ, लाहुल-स्पीति में पांच, कांगड़ा में पांच तथा ऊना में एक सडक़ बंद है। प्रदेश में 44 डीटीआर प्रभावित हैं। इनमें कुल्लू में 35, शिमला में चार, कांगड़ा में तीन तथा मंडी में दो ट्रांसफार्मर बंद हैं। 38 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हैं। इनमें हमीरपुर में 19, शिमला में 18 और कांगड़ा में एक योजना शामिल है। रविवार सुबह प्रदेश में 122 सडक़ें, 96 डीटीआर और 33 पेयजल योजनाएं प्रभावित थीं। शाम तक बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ और प्रभावित ट्रांसफार्मरों की संख्या घटकर 44 रह गई। हालांकि बंद सडक़ों की संख्या बढक़र 135 हो गई, जबकि प्रभावित पेयजल योजनाएं भी बढक़र 38 पहुंच गईं।