West Bengal पश्चिम बंगाल: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने बड़ा बयान दिया है। सीमा क्षेत्रों के दौरे के बाद सोमवार को उन्होंने कहा कि SIR लागू होने के बाद राजनीतिक दलों द्वारा कई “भ्रामक और भ्रम पैदा करने वाले” बयान दिए जा रहे हैं, जिनकी वास्तविकता जानने के लिए उन्होंने खुद जमीनी स्तर पर जांच की है।
राज्यपाल बोले कि SIR को लेकर उन्हें बड़ी संख्या में शिकायतें, आपत्तियां और ज्ञापन प्राप्त हुए थे, जिसके बाद उन्होंने खुद स्थिति का आकलन करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा “राज्यपाल होने के नाते मुझे इस मामले पर कई प्रतिनिधित्व मिले। इसलिए मैंने स्वयं जमीन पर जाकर स्थिति का वास्तविक आकलन करने का फैसला किया। विस्तृत जांच की गई है। बॉर्डर पर बीएसएफ अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की, सीमा क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया और खुद स्थिति का मूल्यांकन किया।”
उन्होंने दावा किया कि SIR को लेकर जनता में जो भय और भ्रम फैलाया जा रहा है, वह योजनाबद्ध तरीके से किया गया प्रतीत होता है। बोस ने कहा, “ऐसा लगता है कि SIR के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने की एक संगठित कोशिश की जा रही है।”
राज्यपाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR प्रक्रिया लागू होने के बाद कई बॉर्डर इलाकों में अवैध प्रवासियों का उल्टा माइग्रेशन देखने को मिल रहा है। भाजपा का दावा है कि यह साबित करता है कि SIR जरूरी था, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे एनआरसी लागू करने की दिशा में एक “राजनीतिक साजिश” बता रही है।
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच राज्यपाल का बॉर्डर दौरा और ये टिप्पणी इस मुद्दे को और गर्मा सकती है। बोस ने संकेत दिया कि उनकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भी भेजी जाएगी। राज्य में SIR को लेकर जारी टकराव के बीच राज्यपाल का “ग्राउंड रियलिटी चेक” अब राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।