साधु-संतों का अपमान करने वालों पर होगी कार्रवाई, गीता पाठ कार्यक्रम में बोले शुभेंदु अधिकारी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित सामूहिक गीता पाठ कार्यक्रम में पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में समय और शासन दोनों बदल गए हैं और अब साधु-संतों को डराने या उनका अपमान करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि साधु-संत निर्भय होकर धार्मिक कार्यक्रम कर सकते हैं।
नेताजी इंडोर स्टेडियम में 11 हजार कंठों से आयोजित गीता पाठ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने साधु-संतों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अपनी सरकार का रुख सामने रखा। उन्होंने चेतावनी दी कि साधु-संतों का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां पहले जैसी नहीं हैं। उनके मुताबिक राज्य में सरकार और समय दोनों बदल चुके हैं। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से धार्मिक गतिविधियों को बिना डर के जारी रखने की बात कही।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि साधु-संत अपने धार्मिक कर्तव्यों और गतिविधियों को जारी रखेंगे। कोई व्यक्ति उनकी बातों से सहमत या असहमत हो सकता है, लेकिन उनका अपमान करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने लोगों से गीता पाठ करने, शंख बजाने और धार्मिक गतिविधियों में बिना भय के हिस्सा लेने की बात भी कही। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अब समय बदल चुका है और लोगों को धार्मिक कार्यक्रम करने से डरने की जरूरत नहीं है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हुए। सामूहिक रूप से गीता का पाठ किया गया। आयोजन के दौरान पूरा नेताजी इंडोर स्टेडियम धार्मिक वातावरण में नजर आया।
शुभेंदु अधिकारी ने अपने भाषण में पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की नीतियों की आलोचना भी की। उन्होंने दावा किया कि पहले साधु-संतों और धार्मिक गतिविधियों को लेकर अलग परिस्थितियां थीं, जबकि उनकी सरकार में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। यह बयान उनकी ओर से पूर्व सरकार पर लगाए गए राजनीतिक आरोपों का हिस्सा था।
उन्होंने कहा कि साधु-संतों को डराने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ सरकार सख्त रुख अपनाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक व्यक्तियों के अपमान की शिकायत सामने आने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
गीता पाठ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने धार्मिक परंपराओं को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने लोगों से गीता का पाठ करने और अपनी धार्मिक गतिविधियां निर्भय होकर जारी रखने का आह्वान किया।
इस दौरान शुभेंदु अधिकारी ने साधु-संतों के सम्मान को लेकर कई बार अपनी सरकार की स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के खिलाफ अपमानजनक गतिविधियां स्वीकार नहीं की जाएंगी।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने धार्मिक आयोजनों को लेकर पिछली सरकार और वर्तमान सरकार के बीच अंतर बताने की कोशिश की। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि शासन बदलने के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया है।
सामूहिक गीता पाठ के इस आयोजन में 11 हजार कंठों से गीता पाठ किया गया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच मुख्यमंत्री ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में शुभेंदु अधिकारी ने स्वयं गीता के एक अध्याय का पाठ किया।
मुख्यमंत्री के संबोधन का प्रमुख हिस्सा साधु-संतों की सुरक्षा और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि किसी साधु या संत को उसकी धार्मिक गतिविधियों के कारण डराया नहीं जाना चाहिए।
शुभेंदु अधिकारी ने इस दौरान अपने राजनीतिक विरोधियों को भी निशाने पर लिया। पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर लगाए गए आरोपों के जरिए उन्होंने कहा कि राज्य की वर्तमान सरकार धार्मिक गतिविधियों को लेकर अलग नीति अपना रही है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में अब साधु-संत बिना किसी भय के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। गीता पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर किसी प्रकार का डर नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने साधु-संतों के अपमान के मामलों में गिरफ्तारी की चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ऐसे मामलों में चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि धार्मिक व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक गतिविधियों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान बार-बार गीता और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख हुआ। उन्होंने लोगों को गीता का पाठ करने के लिए प्रेरित किया और इसे बिना किसी भय के करने की बात कही।
नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हजारों लोगों ने एक साथ गीता पाठ में हिस्सा लिया। सामूहिक पाठ के कारण आयोजन का मुख्य केंद्र धार्मिक गतिविधियां रहीं, जबकि मुख्यमंत्री के संबोधन में धार्मिक विषयों के साथ राजनीतिक आरोप भी शामिल रहे।
शुभेंदु अधिकारी इससे पहले भी पूर्ववर्ती सरकारों पर बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को कमजोर करने के आरोप लगा चुके हैं। सितंबर में एक अन्य कार्यक्रम में भी उन्होंने पूर्ववर्ती वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों को लेकर इसी तरह के आरोप लगाए थे। ये आरोप भाजपा सरकार के राजनीतिक रुख का हिस्सा रहे हैं।
रविवार के कार्यक्रम में उनका मुख्य संदेश यह रहा कि वर्तमान सरकार साधु-संतों के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई साधु-संतों को डराने या उनका अपमान करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने खुद भी गीता के एक अध्याय का पाठ किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने सामूहिक गीता पाठ में भाग लिया।
नेताजी इंडोर स्टेडियम से शुभेंदु अधिकारी ने साफ किया कि उनकी सरकार धार्मिक आयोजनों और साधु-संतों की गतिविधियों को लेकर अपने रुख पर कायम रहेगी। साथ ही उन्होंने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अब समय और शासन दोनों बदल चुके हैं। हालांकि पूर्व सरकार को लेकर कही गई बातें मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं।