कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि महुआ मोइत्रा जब भी अपने कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र का दौरा करेंगी, उनकी सुरक्षा में दो अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। यह व्यवस्था अगले 30 दिनों तक लागू रहेगी। अदालत ने कहा कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपने संसदीय क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से जाकर अपने दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर मिलना चाहिए।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। महुआ ने अदालत में दावा किया था कि अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्हें लगातार विरोध और कथित हमलों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि सांसद पर कथित तौर पर अंडे, आलू और पत्थर फेंकने जैसी घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं के कारण उनके लिए अपने संसदीय क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम करना मुश्किल हो रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि महुआ मोइत्रा को सांसद होने के नाते पहले से सुरक्षा मिली हुई है। इस पर अदालत ने पूछा कि यदि पर्याप्त सुरक्षा मौजूद थी तो ऐसी घटनाएं कैसे हुईं जिनमें पुलिस को एफआईआर तक दर्ज करनी पड़ी। कोर्ट ने माना कि सामने आई घटनाएं प्रथम दृष्टया सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती हैं।
अदालत ने निर्देश दिया कि महुआ मोइत्रा जब भी अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करें तो उन्हें दो अतिरिक्त पुलिसकर्मी उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए सांसद को अपने दौरे से कम से कम 48 घंटे पहले कृष्णानगर पुलिस जिले के एसपी को ईमेल के जरिए अपने कार्यक्रम की जानकारी देनी होगी। इसके बाद पुलिस उनकी यात्रा और क्षेत्र में मौजूदगी के दौरान आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेगी।
महुआ मोइत्रा की तरफ से अदालत में कृष्णानगर सर्किट हाउस से जुड़ी एक घटना का भी उल्लेख किया गया। उनके वकील ने दावा किया कि रात करीब साढ़े दस बजे सर्किट हाउस का आवंटन रद्द कर दिया गया था और उस समय बाहर कथित तौर पर विरोध करने वाले लोग मौजूद थे। इस घटना को भी सुरक्षा संबंधी चिंता के उदाहरण के तौर पर अदालत के सामने रखा गया। हाई कोर्ट की ओर से दी गई अतिरिक्त सुरक्षा फिलहाल 30 दिनों तक जारी रहेगी। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार को सुरक्षा व्यवस्था और उठाए गए कदमों को लेकर अदालत के सामने रिपोर्ट पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
Tags: