कोलकाता। भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर वर्ष 2020 में हुए कथित हमले के मामले में पुलिस ने करीब छह साल बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रिपन शेख और संजीव मंडल के रूप में बताई गई है। पुलिस के अनुसार, दोनों को दक्षिण 24 परगना जिले के मोगराहाट पश्चिम इलाके से पकड़ा गया।
पुलिस ने दावा किया है कि आरोपियों के पास से आग्नेयास्त्र भी बरामद किए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला दिसंबर 2020 में सामने आया था, जब भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे। दक्षिण 24 परगना जिले के शिराकोल इलाके के पास उनके काफिले पर कथित तौर पर हमला हुआ था।
उस समय जेपी नड्डा एक राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उनके काफिले में प्रदेश भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप घोष और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार समेत कई अन्य नेता मौजूद थे।
घटना के बाद भाजपा नेताओं ने काफिले पर हमले को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि अगर वाहन बुलेटप्रूफ नहीं होता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
हमले की घटना के बाद राज्य की राजनीति में काफी विवाद हुआ था। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। भाजपा ने इसे अपने नेताओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया था, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से उस समय आरोपों को लेकर अलग रुख सामने आया था।
अब पुलिस की कार्रवाई के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना में उनकी भूमिका और अन्य जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या गिरफ्तार आरोपी सीधे तौर पर उस समय हुई घटना से जुड़े थे और क्या उनके साथ कोई अन्य लोग भी शामिल थे।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले में गिरफ्तारी के बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी की संभावना बढ़ गई है। भाजपा लंबे समय से इस घटना को लेकर कार्रवाई की मांग करती रही है।
दक्षिण 24 परगना क्षेत्र में हुई यह घटना उस समय पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी चर्चा में रही थी। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं और भाजपा अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी थी।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाई जा रही है। आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
हथियार बरामदगी के दावे के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में हुआ था या नहीं।
फिलहाल दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा कर रही है।
छह साल पुराने इस मामले में हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर 2020 की उस घटना को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब आगे की जांच और पुलिस की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि मामले में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे और आरोपों की स्थिति क्या है।