कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए राज्य के विकास और बंगाली भाषा, संस्कृति तथा परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय उन्हें दिया। कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न पहलों से पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिली है। उन्होंने राज्य की पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने बंगाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण तथा विकास के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया है। इसी क्रम में राज्य सरकार भी बंगाली भाषा, साहित्य और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को स्कूलों और मदरसों में अनिवार्य किए जाने के फैसले का भी उल्लेख किया।
बंगाली भाषा और संस्कृति को लेकर दिया बड़ा बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, साहित्य और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी हुई है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिल रहा है।अधिकारी ने प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और उनके द्वारा रचित राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का विशेष उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने बंकिम चंद्र की रचना को सम्मान दिया है और राज्य सरकार ने इसे शैक्षणिक संस्थानों में लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं।मुख्यमंत्री के अनुसार, बंगाली भाषा और संस्कृति को प्रोत्साहित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य
शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के स्कूलों और पंजीकृत मदरसों में 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य किया है।उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रगीत के माध्यम से विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।इससे पहले सितंबर 2026 में मुख्यमंत्री ने स्कूलों में वंदे मातरम के गायन से संबंधित निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया था।उन्होंने कहा था कि शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर सरकार के निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर सार्वजनिक चर्चा भी हुई है।
पिछली सरकारों पर लगाए गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पश्चिम बंगाल की पिछली सरकारों पर भी हमला बोला।उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने बंगाली भाषा, संस्कृति और राज्य के लोगों के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।अधिकारी ने कहा कि वर्तमान सरकार बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने के लिए नई पहल कर रही है।हालांकि, पिछली सरकारों द्वारा कोई काम नहीं किए जाने का बयान उनका राजनीतिक आरोप है। इसे विकास कार्यों और सांस्कृतिक नीतियों के स्वतंत्र मूल्यांकन का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।इससे पहले भी अधिकारी वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस की सरकारों की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं।
मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर कैबिनेट का प्रस्ताव
पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष प्रस्ताव भी पारित किया।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट ने सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री के योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रस्ताव स्वीकार किया है।उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल और उसके बाद प्रधानमंत्री के रूप में किए गए कार्यों का उल्लेख है।अधिकारी के अनुसार, प्रस्ताव को बंगाली और अंग्रेजी भाषाओं में तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा जाएगा।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्य सरकार उद्योग, बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक विकास से संबंधित योजनाओं को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल के विकास के लिए सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करना महत्वपूर्ण है।उनके अनुसार, राज्य के आर्थिक विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी आवश्यक है।
बंगाल की ऐतिहासिक विरासत को बढ़ावा देने की पहल
पश्चिम बंगाल का भारतीय साहित्य, कला, संगीत और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और स्वामी विवेकानंद जैसी प्रमुख हस्तियां राज्य की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का हिस्सा हैं।मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य की इस ऐतिहासिक पहचान को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने की आवश्यकता है।उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सांस्कृतिक मूल्यों और ऐतिहासिक जानकारी को महत्व देने पर जोर दिया।
राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर चर्चा तेज
शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद राज्य में भाषा, संस्कृति और राष्ट्रगीत से जुड़े मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं।मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए पिछली सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।वहीं, स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य किए जाने का फैसला राज्य की शिक्षा तथा सांस्कृतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।फिलहाल बंगाल सरकार ने सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने को अपनी प्राथमिकता बताया है। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके प्रभाव पर ध्यान रहेगा।