West Bengal पश्चिम बंगाल। दिवाली और काली पूजा के पावन अवसर पर कोलकाता शहर ने एक बार फिर अपनी रोशनी और उत्सवधर्मिता से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे शहर में बाजार, सड़कें और प्रमुख सार्वजनिक स्थल रंग-बिरंगी लाइटों, दीयों और आकर्षक सजावटों से सजी नजर आईं। इस दौरान शहरवासियों और पर्यटकों ने उत्सव का आनंद लिया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। कोलकाता के प्रमुख बाजारों जैसे न्यू मार्केट, रेवेन्यू मार्केट और पार्क स्ट्रीट पर दुकानदारों ने दुकानों को रंगीन लाइटों और दीपों से सजाया। दुकानदारों और घरों में रौनक देखते ही बनती थी। लोग खरीदारी में व्यस्त रहे और अपने घरों और कार्यस्थलों को दीपों और रंगोली से सजाया। इस दौरान बाजारों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि त्योहार की खुशी सुरक्षित माहौल में मनाई जा सके।
स्थानीय लोग और परिवार पारंपरिक पूजा विधि का पालन करते हुए काली पूजा और दीपावली की आराधना में शामिल हुए। विशेष रूप से काली पूजा के अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मंदिरों में भक्तों ने मां काली के समक्ष दीपक जलाकर और प्रसाद चढ़ाकर आस्था व्यक्त की। कोलकाता में कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी ने मिलकर दीपावली और काली पूजा की खुशियों में भाग लिया। शहरवासियों ने पारंपरिक व्यंजन और मिठाइयों का आनंद भी लिया। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के त्योहार न केवल सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापार के लिए भी लाभकारी होते हैं। दुकानदारों और व्यापारियों के लिए दिवाली और काली पूजा का सीजन आमदनी बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। शहरवासियों ने सोशल मीडिया पर अपने घरों और नगर के सजावट की तस्वीरें साझा कीं और आपसी शुभकामनाएं दीं। इस तरह से कोलकाता में दिवाली और काली पूजा का उत्सव सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से सभी आयामों में सफल रहा। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और नागरिकों ने मिलकर यह संदेश भी दिया कि त्योहार को सादगी, सुरक्षा और सामुदायिक भावना के साथ मनाना चाहिए। इस तरह के आयोजन शहर में भाईचारे और समुदायिक जुड़ाव को भी बढ़ाते हैं।