पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद TMC में बगावत तेज़, कई विधायक और सांसद छोड़ रहे पार्टी

Update: 2026-06-11 10:25 GMT

Kolkata कोलकाता : पिछले महीने हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह और बगावत ने उग्र रूप ले लिया है। पार्टी के कई नेता अब इसे डूबते जहाज़ की तरह छोड़ने लगे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे उनके राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ेगा।

सूत्रों के अनुसार, रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई में 60 से अधिक विधायकों ने ममता बनर्जी और TMC के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी। उन्होंने विधानसभा में खुद को पार्टी का "असली प्रतिनिधि" बताते हुए अलग रुख अपनाया। इस कदम से ममता बनर्जी के लिए पार्टी का एकजुट रहना और भी मुश्किल हो गया है।

हालांकि यह बगावत केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 20 लोकसभा सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA को समर्थन देने की बात कही। इस कदम ने पार्टी की स्थिति को और नाजुक बना दिया। नेताओं का यह रवैया ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुआ है।



साथ ही, चार राज्यसभा सांसदों ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है। इससे पार्टी की केंद्रीय संसदीय ताकत पर भी असर पड़ा है और ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नेताओं के इस रवैये के पीछे असंतोष और आगामी राजनीतिक अवसरों को सुरक्षित करने की कोशिश प्रमुख कारण हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि TMC की हार और उसके बाद चल रही बगावत पार्टी की स्थिति को कमजोर करने वाली है। कई पुराने और वरिष्ठ नेता अब पार्टी के नेतृत्व और भविष्य को लेकर असंतोष जताते दिख रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनावों में मिली हार और पार्टी के अंदर उठ रही आलोचनाओं के बीच उन्हें अपने राजनीतिक करियर के लिए नए रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी लगातार अपने विधायकों और सांसदों से संपर्क कर स्थिति को काबू में करने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि, नेताओं की बढ़ती संख्या और उनके अलग रुख ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह बगावत इसी तरह जारी रही, तो TMC को अगले चुनावों में और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

अंदरूनी कलह के बीच, पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी असंतोष देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि TMC को अब अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना और नेताओं को संतुष्ट करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में TMC की स्थिति फिलहाल स्थिर नहीं है और ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। पार्टी की बागी प्रवृत्ति और नेताओं के इस्तीफ़े भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य को काफी प्रभावित कर सकते हैं।

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