कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया है। यह मामला पिछले साल दिसंबर में कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई कथित अव्यवस्था और अफरातफरी से जुड़ा है।

मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के एडवोकेट जनरल सुरोजित नाथ मित्रा ने अदालत के पिछले निर्देश के अनुपालन में दो रिपोर्ट पेश कीं। इनमें एक रिपोर्ट पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से और दूसरी बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के कमिश्नर की ओर से दाखिल की गई थी। दोनों रिपोर्टों में मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई घटना और उसके बाद की गई पुलिस जांच से संबंधित जानकारी शामिल थी।

30 नवंबर तक जारी रहेगी अंतरिम सुरक्षा

मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई। अदालत ने अरूप बिस्वास को मिली अंतरिम सुरक्षा को 30 नवंबर या अदालत के अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, जारी रखने का निर्देश दिया।

इसका मतलब है कि फिलहाल बिस्वास के खिलाफ इस मामले में पुलिस द्वारा कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। पूर्व मंत्री ने अपने खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है।

अदालत ने उनकी याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है। उस दिन कोर्ट इस मामले से जुड़ी दलीलों और पुलिस की ओर से पेश की गई सामग्री पर आगे विचार करेगा।

मेसी के कार्यक्रम में मची थी अफरातफरी

यह मामला दिसंबर में साल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित लियोनेल मेसी से जुड़े कार्यक्रम के दौरान हुई कथित अव्यवस्था के बाद सामने आया था। कार्यक्रम को लेकर फुटबॉल प्रशंसकों में भारी उत्साह था और बड़ी संख्या में लोग स्टेडियम पहुंचे थे।

कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर ऐसी स्थिति पैदा हो गई थी, जिससे आयोजन की व्यवस्था पर सवाल उठे। कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बना और दर्शकों तथा प्रशंसकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की। आयोजन की व्यवस्थाओं, सुरक्षा इंतजामों और कार्यक्रम के दौरान मौजूद जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए।

इसी सिलसिले में पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास के खिलाफ भी आपराधिक कार्यवाही शुरू हुई। बिस्वास ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की और अपने खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की।

पुलिस जांच से जुड़ी दो रिपोर्ट अदालत में पेश

मंगलवार की सुनवाई में राज्य के एडवोकेट जनरल ने अदालत को दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट सौंपीं। इनमें पहली रिपोर्ट पश्चिम बंगाल के DGP की ओर से और दूसरी बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के कमिश्नर की ओर से पेश की गई।

अदालत ने पहले पुलिस से मामले की जांच और घटनाक्रम से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसी निर्देश के तहत दोनों रिपोर्ट अदालत के सामने रखी गईं।

इन रिपोर्टों के जरिए पुलिस जांच की स्थिति, घटना के दौरान की परिस्थितियों और मामले में अब तक उठाए गए कदमों से अदालत को अवगत कराया गया। रिपोर्टों की सामग्री पर आगे की सुनवाई में विस्तार से विचार किए जाने की संभावना है।

बिस्वास ने आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की

पूर्व मंत्री की ओर से हाई कोर्ट में दायर याचिका का मुख्य उद्देश्य उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कराना है। उनकी ओर से अदालत में यह मामला उठाया गया है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर न्यायिक समीक्षा की जरूरत है।

अदालत ने फिलहाल मामले की अंतिम मेरिट पर कोई फैसला नहीं दिया है। इसके बजाय बिस्वास को अंतरिम राहत जारी रखते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है।

अंतरिम सुरक्षा बढ़ाए जाने से पूर्व मंत्री को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का अंतिम फैसला अभी बाकी है।

17 नवंबर को फिर होगी सुनवाई

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बिस्वास की याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है। उस सुनवाई में अदालत यह देख सकती है कि पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ी है और बिस्वास के खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में उपलब्ध सामग्री क्या कहती है।

अदालत के सामने पेश की गई पुलिस रिपोर्ट भी मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग को लेकर कानूनी दलीलें पेश की जाएंगी।

आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे थे सवाल

मेसी के कार्यक्रम के दौरान हुई अफरातफरी ने बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। किसी विश्वस्तरीय खिलाड़ी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की संभावना पहले से रहती है। ऐसे में प्रवेश, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम जरूरी होते हैं।

घटना के बाद आयोजन से जुड़े कई पहलुओं की जांच की गई। पुलिस की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि अव्यवस्था किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी बनती है या नहीं।

फिलहाल पूर्व मंत्री को राहत

कलकत्ता हाई कोर्ट के मंगलवार के आदेश से अरूप बिस्वास को फिलहाल राहत मिल गई है। अदालत ने उनकी अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक बढ़ा दी है। हालांकि, यह राहत मामले का अंतिम निपटारा नहीं है।

अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 17 नवंबर होगी, जब अदालत बिस्वास की उस याचिका पर सुनवाई करेगी जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की है।

मेसी के कार्यक्रम से जुड़ा यह मामला अब केवल आयोजन में हुई अफरातफरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जांच और पूर्व मंत्री के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को लेकर भी कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। अदालत में पेश की गई दोनों पुलिस रिपोर्ट और आगामी सुनवाई के दौरान सामने आने वाली दलीलों से यह स्पष्ट हो सकता है कि मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और बिस्वास के खिलाफ चल रही कार्यवाही को लेकर अदालत क्या रुख अपनाती है।

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