कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भीषण भगदड़ के बाद राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने के बाद सरकार ने भीड़ प्रबंधन का अनुभव रखने वाले नौ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, कोलकाता पुलिस ने प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए 11 सूत्री सुरक्षा परामर्श जारी किया है। सरकार का उद्देश्य दुर्गा पूजा के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करना, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटना है।
19 मौतों के बाद सरकार ने बढ़ाई सख्ती
कोलकाता के चोरबागान स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। उत्सव के माहौल के बीच अचानक हुई इस घटना में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि 25 अन्य घायल हुए। हादसे के बाद पूजा आयोजकों की व्यवस्था, पुलिस की तैनाती और भीड़ नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रारंभिक जांच में भीड़ का अत्यधिक दबाव, संकरे रास्ते, बारिश और अव्यवस्थित प्रवेश-निकास व्यवस्था जैसे कारण सामने आए हैं। हालांकि, हादसे की वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जांच जारी है। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने रविवार, 18 अक्टूबर को अनुभवी आईपीएस अधिकारियों की तैनाती का निर्णय लिया।
9 अनुभवी IPS अधिकारियों की तैनाती
राज्य सरकार ने दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन का अनुभव रखने वाले नौ आईपीएस अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी है। इन अधिकारियों में महानिरीक्षक सीमा सुमनजीत राय, आईजी महमूद अख्तर, यातायात आईजी मिराज खालिद, एसटीएफ डीआईजी रूपेश कुमार, यातायात डीआईजी शुभंकर भट्टाचार्य, सीआईडी डीआईजी तरुण हलदर, प्रवर्तन शाखा के वरिष्ठ अधीक्षक सौम्य राय, यातायात एसपी प्रियब्रत राय और सीआईडी के वरिष्ठ अधीक्षक दीपक सरकार शामिल हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन अधिकारियों के पास कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान भारी भीड़ संभालने का अनुभव है। इन्हें प्रमुख पूजा स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को मजबूत बनाने और चोरबागान जैसी घटना दोबारा न होने देने के उद्देश्य से जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कोलकाता पुलिस ने जारी किए 11 सूत्री सुरक्षा निर्देश
दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कोलकाता पुलिस ने विशेष परामर्श जारी किया है। इसमें बारिश के दौरान भीड़ नियंत्रण, पंडालों में प्रवेश और निकास, प्रकाश व्यवस्था, पुलिसकर्मियों की तैनाती तथा पूजा समितियों के स्वयंसेवकों के साथ समन्वय जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सुरक्षा व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। विशेष रूप से उन पंडालों में अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
बारिश होने पर बंद होंगे पंडालों के प्रवेश द्वार
नई सुरक्षा परामर्श के अनुसार, बारिश के दौरान आवश्यकता पड़ने पर पूजा पंडालों के प्रवेश द्वार बंद किए जाएंगे। ऐसी स्थिति में पहले से पंडाल के भीतर मौजूद श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जाएगी। बारिश और भीड़ के दबाव के बीच नए लोगों को पंडाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि बारिश के दौरान भी वे अपनी निर्धारित जगह न छोड़ें। इसका उद्देश्य अचानक मौसम बदलने की स्थिति में भीड़ को व्यवस्थित रखना और अफरातफरी की आशंका कम करना है।
VIP वाहनों की पंडाल तक एंट्री पर रोक
कोलकाता पुलिस ने वीआईपी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। परामर्श के अनुसार, वीआईपी को लेकर आने वाले वाहनों को सीधे पूजा पंडाल तक जाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे वाहनों को निर्धारित दूरी पर खड़ा करना होगा, ताकि श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास मार्ग प्रभावित न हों। पुलिस का प्रयास है कि विशेष वाहनों की आवाजाही के कारण आम श्रद्धालुओं को परेशानी न हो और भीड़ नियंत्रण में कोई बाधा उत्पन्न न हो।
पूजा समितियों की घोषणाओं पर रहेगी पुलिस की नजर
चोरबागान भगदड़ के बाद पूजा आयोजकों द्वारा लाउडस्पीकर से की जाने वाली घोषणाओं की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कोलकाता पुलिस ने अधिकारियों को पूजा समितियों की घोषणाओं पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिसकर्मी यह सुनिश्चित करेंगे कि श्रद्धालुओं के प्रवेश और बाहर निकलने के रास्तों में अचानक बदलाव न किया जाए। बिना समुचित जानकारी और व्यवस्था के मार्ग बदलने से भीड़ में भ्रम पैदा हो सकता है। इसलिए आयोजन समितियों को पुलिस के साथ समन्वय बनाकर काम करना होगा।
हर पुलिसकर्मी के साथ 5 से 6 स्वयंसेवक करेंगे काम
भीड़ नियंत्रण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस और पूजा समितियों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक पुलिस अधिकारी और कांस्टेबल को संबंधित पूजा समिति के पांच से छह स्वयंसेवकों के साथ तालमेल बनाकर काम करने का निर्देश दिया गया है। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों से आने-जाने में सहायता करेंगे और भीड़ बढ़ने की स्थिति में पुलिस को आवश्यक जानकारी देंगे। इस व्यवस्था से भीड़ के दबाव को समय रहते पहचानने और आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बैरिकेडिंग और लाउडस्पीकर की होगी व्यवस्था
कोलकाता पुलिस ने प्रमुख पूजा पंडालों में तैनात कर्मियों को रस्सियां, अवरोधक रेलिंग और छोटे लाउडस्पीकर जैसे उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं। इनका उपयोग भीड़ को व्यवस्थित करने और आपातकालीन स्थिति में जरूरी घोषणाएं करने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही पूजा स्थलों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस का मानना है कि स्पष्ट मार्ग, पर्याप्त रोशनी और प्रभावी सूचना व्यवस्था से भीड़ में भ्रम तथा अचानक धक्का-मुक्की जैसी स्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है।
भगदड़ मामले में सात आरोपी गिरफ्तार
चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें पूजा आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां घटना के समय भीड़ की स्थिति, प्रवेश-निकास मार्गों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की पड़ताल कर रही हैं।
दोबारा हादसा न हो, इसके लिए प्रशासन अलर्ट
कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालु विभिन्न पूजा पंडालों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्थाओं की विशेष भूमिका होती है। चोरबागान की घटना के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने पूजा पंडालों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। सरकार की ओर से नौ अनुभवी आईपीएस अधिकारियों की तैनाती और कोलकाता पुलिस के 11 सूत्री निर्देशों को भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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