Calcutta.कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले महीने बंगाल के मुर्शिदाबाद के कई इलाकों में वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध के दौरान हुई हिंसा में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक नेता महबूब आलम शामिल थे। जागरण डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार महबूब आलम टीएमसी पार्षद हैं।रिपोर्ट उच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष पेश की गई है। जांच के दौरान समिति के सदस्यों ने गांवों का दौरा किया और हिंसा के पीड़ितों से बात की।जांच दल में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और न्यायिक सेवाओं के सदस्य शामिल थे।पुलिस निष्क्रिय, हिंदुओं को बनाया निशानारिपोर्ट में कहा गया है कि हिंदुओं को निशाना बनाकर की गई हिंसा के दौरान स्थानीय पुलिस पूरी तरह से निष्क्रिय और विभिन्न स्थानों पर अनुपस्थित थी।संसद द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक पारित किए जाने के बाद अप्रैल में पश्चिम बंगाल के कई जिलों में हिंसा भड़क उठी थी।

सबसे अधिक प्रभावित जिला मुर्शिदाबाद था, जहां तीन लोगों की जान चली गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। कई परिवार जिलों से भागकर मालदा में शरण लिए हुए हैं।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गांव में 113 घर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। 12 अप्रैल को एक हिंदू परिवार के व्यक्ति और उसके बेटे की उनके मुस्लिम पड़ोसियों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद हुई हिंसा ने इलाके की दुकानों और बाजारों को तहस-नहस कर दिया।चुनिंदा घरों पर हमला किया गया, पानी की आपूर्ति काट दी गईरिपोर्ट में अंधाधुंध आगजनी और लूटपाट तथा दुकानों और सामानों को लगातार नष्ट किए जाने को भी उजागर किया गया है।मुख्य हमला शुक्रवार, 11 अप्रैल को दोपहर 2.30 बजे के बाद हुआ, जब स्थानीय पार्षद महबूब आलम दंगाइयों के साथ पहुंचे। दंगाई अपने चेहरे ढके हुए आए थे। स्थानीय नेता अमीरुल इस्लाम ने जांच की कि किन घरों पर हमला नहीं हुआ है, और फिर हमलावरों ने उनमें आग लगा दी। हमलावरों ने पानी का कनेक्शन काट दिया था, इसलिए आग नहीं बुझाई जा सकी।किराने की दुकानें, हार्डवेयर की दुकानें, बिजली और कपड़ा की दुकानें नष्ट कर दी गईं। घोषपाड़ा में 29 दुकानें नष्ट कर दी गईं। मंदिर भी नष्ट कर दिए गए। यह सब स्थानीय पुलिस स्टेशन से 300 मीटर के दायरे में हुआ।


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